
सतना। शहर के बस स्टैंड परिसर में स्थित वर्षों पुराना कुआं, जो कभी यात्रियों और स्थानीय लोगों की प्यास बुझाने का एकमात्र सहारा था, अब अपने अस्तित्व की अंतिम सांसें गिन रहा है। यह कुआं, जो कभी इस क्षेत्र की शान और उपयोगिता का प्रतीक था, अब कचरे के ढेर में दफन होकर इतिहास बनता जा रहा है।
नगर निगम की उदासीनता और अव्यवस्था के चलते इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण नहीं हो सका, जिससे यह कुआं अब पूरी तरह से उपेक्षा का शिकार हो गया है। कई दशकों पहले यह कुआं बस स्टैंड पर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए जीवन रेखा हुआ करता था। गर्मियों की तपती दोपहर में या लंबी यात्रा के बाद थके-हारे यात्री इस कुएं के ठंडे और शुद्ध पानी से अपनी प्यास बुझाते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह कुआं न केवल उपयोगी था, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण था, जहां लोग एकत्रित होकर आपस में बातचीत करते थे। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में इस कुएं की स्थिति बद से बदतर होती चली गई। करीब पांच साल पहले बस स्टैंड के दक्षिणी हिस्से में कुएं के समीप अवैध रूप से बना बस ऑनर्स एसोसिएशन का कार्यालय ढहाया गया था। इसके बाद इस क्षेत्र में आवागमन बढ़ा और कुआं धीरे-धीरे कचरे का ढेर बनता गया। बस स्टैंड से निकलने वाला कचरा, जैसे प्लास्टिक की बोतलें, खाने-पीने की वस्तुएं और अन्य मलबा, इस कुएं में जमा होने लगा। नतीजतन, कुआं अब पूरी तरह से कचरे से पट चुका है और इसका मूल स्वरूप लगभग खत्म हो चुका है।
संरक्षण में दिलचस्पी नहीं
स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि नगर निगम ने इस ऐतिहासिक कुएं को संरक्षित करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। न तो कुएं की सफाई के लिए कोई अभियान चलाया गया और न ही इसे कचरे से बचाने के लिए कोई उपाय किए गए। एक स्थानीय निवासी, रामलाल ने बताया, यह कुआं हमारे लिए गर्व की बात था। लेकिन अब इसे देखकर दुख होता है। नगर निगम को चाहिए कि इसे बचाने के लिए तुरंत कदम उठाए।”विशेषज्ञों का मानना है कि इस कुएं का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है, और इसे संरक्षित कर इसे पर्यटक स्थल के रूप में भी विकसित किया जा सकता है। इस ऐतिहासिक कुएं की मौजूदा हालत न केवल नगर निगम की लापरवाही को दर्शा रही है, बल्कि धरोहरों को नजर अंदाज करने के आरोप भी लग रहे हैं।
