इंदौर: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दशहरे पर एक संगठन द्वारा जीवित महिला का पुतला दहन करने की घोषित योजना पर रोक लगाते हुए कड़ा आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि ऐसा कृत्य मौलिक अधिकारों और गरिमा का हनन है तथा इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।यह आदेश उस याचिका पर आया, जो सोनम रघुवंशी की मां ने शाजापुर मूल निवासी, हाईकोर्ट अधिवक्ता जेनिथ छबलानी के माध्यम से दायर की थी।
याचिका में बताया गया था कि इंदौर का संगठन “पौरुष” विजयादशमी पर “सुरपर्णखा दहन” नामक कार्यक्रम करने जा रहा है, जिसमें कुछ महिलाओं के पुतले जलाने की घोषणा की गई थी। पर्चों में सोनम का नाम और चेहरा भी शामिल कर प्रचार किया गया।न्यायालय ने आदेश दिया कि राज्य और पुलिस यह सुनिश्चित करें कि विजयादशमी पर किसी भी जीवित व्यक्ति का पुतला दहन न हो।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय व्यवस्था का मूल सिद्धांत यही है कि दोष सिद्ध होने से पहले कोई भी व्यक्ति केवल आरोपी होता है, अपराधी नहीं। साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि इस प्रकार के आयोजन भारत जैसे लोकतांत्रिक देश की मूल भावना और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं और इन्हें किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
