भोपाल: अटल पथ जिसे शहर की खूबसूरती में चार-चाँद लगाने और नागरिकों को आधुनिक सुविधाओं से लैस सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया था,आज उस पथ पर जगह-जगह टूटी जालियाँ, बैठने के लिए लगाई गई टूटी बेंचें और गंदगी का अंबार देखा जा सकता है। यह स्थिति सार्वजनिक धन लगा कर बनाने और उसके रखरखाव में कमी दर्शाती है.शाम ढलते ही लोगों की चहल-पहल से गुलज़ार रहता था।
यहाँ सुबह की सैर करने वाले, शाम को टहलने वाले परिवार आते थे। लेकिन अब, टूटी-फूटी संरचनाओं और उपेक्षा के कारण, इसकी रौनक फीकी पड़ गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पथ अब सुरक्षित नहीं रहा है और उन्हें यहाँ आने से भी डर लगने लगा है। स्थानीय नागरिक, राजेंद्र सिंह ने बताया, पहले हम अपने बच्चों के साथ यहाँ आते थे, लेकिन अब टूटी जालियों और असामाजिक तत्वों के जमावड़े के कारण हम डरते हैं। स्मार्ट सिटी के नाम पर सिर्फ दिखावा हुआ है, असल में कुछ नहीं बदला शाम होते ही असामाजिक तत्व नशीले पदार्थो का सेवन करते दीखते है जिससे बच्चों पर बुरा असर पड़ता है.
अटल पथ की बदहाली केवल टूटी जालियों और बेंचों तक ही सीमित नहीं है। यहाँ लगाई गई स्ट्रीट लाइटें भी कई जगहों पर खराब हैं या काम नहीं कर रही हैं, जिससे रात के समय यह क्षेत्र पूरी तरह से अँधेरे में डूब जाता है। इससे चोरी और अन्य आपराधिक गतिविधियों का खतरा बढ़ जाता है। पथ पर जगह-जगह कचरे के ढेर और गंदगी का अंबार भी देखने को मिलता है, जो स्वच्छता अभियान और स्मार्ट सिटी के उद्देश्यों पर सवाल उठाता है। ऐसा लगता है कि स्मार्ट सिटी कंपनी ने केवल निर्माण पर ध्यान दिया, लेकिन उसके रखरखाव और स्वच्छता की जिम्मेदारी पूरी तरह से भुला दी गई।
