उज्जैन: पुरातात्विक और धार्मिक महत्व वाले गोवर्धन सागर की जमीन पर नियमों को ताक पर रखकर बनाई गई 51 दुकानों पर अब कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। एनजीटी, हाईकोर्ट और नगर निगम के आदेशों के चलते इन अवैध दुकानों और आसपास के मकानों को तोड़ने की कार्रवाई तय मानी जा रही है। डर के साये में जी रहे भू-माफिया अब ओने-पोने दामों पर सौदा निपटाने की फिराक में हैं, जबकि व्यापारी मुख्यमंत्री तक गुहार लगा चुके हैं।
सप्तसागरों में से एक इस सागर पर जिस तेजी से अतिक्रमण हुआ, उसे अब धीरे-धीरे हटाने की पहल रंग लाने लगी है.एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी से लेकर नगर निगम आयुक्त के संज्ञान में यह पूरा मामला पहुंच चुका है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी नगर निगम को पत्र लिखा है जिसमें गोवर्धन सागर को प्रदूषित होने से बचाने का उल्लेख है.
मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला
व्यापारियों ने मौका पाकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपनी पीड़ा बताते हुए आवेदन दे दिया है, ताकि सीधे तौर पर राहत मिल जाए. जानकारों का मानना है कि एनजीटी ने यदि गोवर्धन सागर बचाने के लिए आदेश दिए है तो फिर दुकाने टूटना तय है.
