दीव, 20 मई (वार्ता) दिल्ली की लड़कियों की कबड्डी टीम की कोच सुनीता ने कहा कि खेल की परिस्थितयां और प्रारुप समुद्र तटों पर खेली जाने वाली बीच कबड्डी को इंडोर कबड्डी से ज्यादा कठिन बनाती हैं।
बीच कबड्डी इनडोर कबड्डी की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है क्योंकि इसमें खिलाड़ियों को प्राकृतिक परिस्थितियों से जूझना पड़ता है। इस खेल के दौरान रेत में पैर धंसने से दौड़ना और दिशा बदलना मुश्किल हो जाता है। इसके साथ ही तेज धूप और समुद्री हवा खिलाड़ियों की सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा लेती है। कभी समुद्र की ठंडी हवा चलती है तो कभी वह पूरी तरह से थम जाती है। ये सभी चीजे प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं।
दिल्ली की टीम की कोच ने कहा, “गैर-तटीय राज्यों के खिलाड़ियों के लिए यह परिस्थितियां और भी कठिन होती हैं क्योंकि वे इनसे अनजान होते हैं। वह कहती हैं, “यहाँ कृत्रिम रेत का टर्फ तो अच्छा है, लेकिन पूरा वातावरण बेहद अलग और चुनौतीपूर्ण है।”
उन्होंने कहा, “यह एक पूरी तरह से अलग माहौल है। सुंदर समुद्र के किनारे खेलना एक अनोखा अनुभव है। कबड्डी तो वैसे ही भारत में काफी लोकप्रिय है। उम्मीद है कि खेलो इंडिया बीच गेम्स के माध्यम से बीच कबड्डी भी अपनी पहचान बनाएगी।”
मैट कबड्डी के अलावा समुद्र तटों पर भी एक कबड्डी खेली जाती है, जिसे बीच कबड्डी कहा जाता है। जहां तक नियमों का सवाल है तो बीच कबड्डी और पारंपरिक कबड्डी के मूल तत्व समान हैं, लेकिन कुछ बदलाव किए गए हैं ताकि यह समुद्र तट की परिस्थितियों के अनुकूल रहे। जैसे कि पारंपरिक कबड्डी में सात जबकि बीच कबड्डी में हर टीम में चार खिलाड़ी होते हैं। हर हाफ 15 मिनट का होता है, जबकि पारंपरिक कबड्डी में 20 मिनट का होता है। बीच कबड्डी में खिलाड़ियों का रिवाइवल नहीं होता जबकि इसका कोर्ट भी काफी छोटा होता है।
घोघला बीच पर हो रहे सभी आठ खेलों के आयोजन की प्रभारी और वरिष्ठ कोच सिमरत गायकवाड़ का मानना है कि बीच कबड्डी के लिए यह बहुत रोमांचक समय है। उन्होंने कहा, “यह एक नया प्रारूप है। खेलो इंडिया बीच गेम्स इस खेल को लोकप्रिय बनाने का बेहतरीन मंच है।”

