भोपाल: कॉलोनियों में बने बच्चों के खेल कूद के पार्कों में अनधिकृत कब्ज़े कर लिए गए है, जिनमे कई ऐसी जगह है जहा वाहन पार्क किये हुए है तो कही घरों के मवेशियों को बाँध रखा है.जिसमे शिकायत का कोई फायदा नहीं हो रहा. क्योंकि कॉलोनी के भीतर अतिक्रमण हटाना सीधे तौर पर नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं हैं। निजी कालोनियों का डेवलपमेंट करते समय 10 फीसदी हिस्सा ग्रीन एंड ओपन रखा जाना जरूरी है।
सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए बनी कालोनियों चार इमली, तुलसी नगर, शिवाजी नगर आदि में कई खुले मैदान हैं। गर्मी के मौसम में बच्चो की छुट्टी के समय जब वह खेलने निकलते है तो उन्हें जगह नहीं मिलती। जिसके साथ ही ऐसी कॉलोनी क्लोज्ड कैंपस नहीं है, ऐसी जगहों पर कब्ज़ा ज्यादा हो रहा है शहर में कम से कम 70 कालोनियां ऐसी हैं जहां इस तरह के कब्जे किए गए हैं। इससे पार्कों की कमी हो गई है.
तुलसी नगर में जहा शासकीय कर्मियों के घर है उस क्षेत्र के मैदान में अक्सर गाडिय़ा कड़ी रहती है, महाराष्ट्र समाज भवन के पास एफ टाइप क्वार्टर इलाके में किसी ने मैदान में मवेशी बांध रखे हैं। उनके लिए तबेला भी बना हुआ है और कंडे भी मैदान में रखे हैं। इसी मैदान में एक कंडम गाड़ी सालों से खड़ी है। जिसमें पौधे उग आए हैं। जिन अफसर की यह गाड़ी बताई जाती है, रिटायर होने के बाद वे मकान भी छोड़कर चले गए हैं। इसी क्षेत्र में जी टाइप क्वार्टरों के एक मैदान में बिजली के खंभे पड़े हुए हैं।
कालोनियों के भीतर इस तरह के अतिक्रमण हटाने में नगर निगम सहयोगी की भूमिका निभा सकता है, लेकिन इसके लिए रहवासी समितियों की सक्रियता और सहयोग जरूरी है।
हरेंद्र नारायणा , कमिश्नर, नगर निगम भोपाल
