श्रीनगर, 13 मई (वार्ता) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को सरकारी मदद और अतिरिक्त बंकरों के निर्माण का आश्वासन दिया।
श्री अब्दुल्ला ने कुपवाड़ा जिले के तंगधार के गोलाबारी प्रभावित इलाकों के दौरे के दौरान यह आश्वासन दिया। वहां उन्होंने ऐसे परिवारों से मुलाकात की, जिन्होंने संकट के दौरान उल्लेखनीय साहस दिखाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “उनका धैर्य प्रेरणादायक है। सरकार उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है – उनके दर्द को अनदेखा नहीं किया जायेगा और उन्हें सम्मान तथा नयी उम्मीद के साथ जीवन फिर से शुरू करने में मदद करने के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा।”
मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि वह गोलाबारी से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए व्यक्तिगत रूप से आये हैं, और उन्होंने दोहराया कि राहत और पुनर्वास उपायों के तहत पीड़ितों को पर्याप्त मदद प्रदान की जाएगी।
तंगधार में सामुदायिक बंकरों का निरीक्षण करते हुए मुख्यमंत्री ने संकट के समय उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, “तनाव बढ़ने के समय ये संरचनाएं जीवन रेखा होती हैं। हम संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले अपने लोगों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त बंकरों का निर्माण सुनिश्चित करेंगे।”
उन्होंने कहा कि तनाव बढ़ने के दौरान सीमा पर रहने वाले लोगों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए व्यक्तिगत बंकरों के निर्माण का मामला केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा।
श्री अब्दुल्ला ने कहा कि हर कोई चाहता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम बना रहे, सिवाय कुछ टेलीविजन एंकरों के जो दूर दिल्ली और नोएडा में बैठे हैं और ऐसा नहीं चाहते।
इस यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने तंगधार, हाजिनार्ड, नचियां, शमस्पोरा, बागबेला, बटपोरा और तरबोनी सहित करनाह सीमा उप-मंडल के विभिन्न गांवों का दौरा किया। उन्होंने आवासीय संरचनाओं को हुए नुकसान का जायजा लिया और प्रभावित निवासियों की शिकायतें सुनीं।
उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता की समीक्षा करने के लिए उप-जिला अस्पताल, तंगधार का भी दौरा किया। उन्होंने बाह्य रोगी और अंतः रोगी इकाइयों, स्त्री रोग, ऑपरेशन थियेटर, अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे सुविधाओं सहित प्रमुख विभागों का निरीक्षण किया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी, डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने उन्हें इस दूरदराज के क्षेत्र में लोगों की सेवा करने के लिए अत्यंत समर्पण और करुणा के साथ काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने रोगियों और परिचारकों से भी बात की और उनकी चिंताओं तथा चिकित्सा सेवाओं की स्थिति के बारे में जानकारी ली।
