नयी दिल्ली 08 मई (वार्ता) केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कहा कि सिंधु नदी के पानी पर हमारे किसानों का हक है और एक-एक बूंद का उपयोग खेती, बिजली तथा विकास में किया जाएगा।
श्री चौहान ने यहां ‘कृषि खरीफ अभियान 2025’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 1960 में सिंधु जल संधि एक ऐतिहासिक गलती थी। देश और किसानों का दुर्भाग्य रहा कि हमारे देश से बहने वाली नदियों का 80 प्रतिशत पानी पाकिस्तान को दे दिया गया। इसलिए पहलगाम आतंकवादी घटना के बाद सिंधु जल समझौता रद्द कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सिंधु नदी के पानी पर हमारे किसानों का हक है। एक-एक बूंद का उपयोग खेती, बिजली तथा विकास में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल-प्रदेश के किसानों के लिए सिंचाई के लिए अधिक पानी मिल सकेगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों की मेहनत से अन्न के भंडार भर दिए हैं। उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। चावल की दो किस्में विकसित की गयी हैं। इससे उत्पादन बढ़ेगा और 20 दिन पहले फसल तैयार हो जाएगी। पानी बचेगा और मीथेन गैस का उत्सर्जन कम होगा। उन्होंने कहा कि जल्द ही ये किस्में किसानों को उपलब्ध कराई जाएंगी। सम्मेलन में 10 से ज्यादा राज्यों के कृषि मंत्रियों ने भाग लिया।
श्री चौहान ने ‘विकसित भारत संकल्प अभियान’ के जरिए वैज्ञानिकों की टीम के गठन और उनके किसानों तक पहुंच बनाने की रूपरेखा भी रखी और बताया कि यह टीमें गांव-गांव पहुंचकर किसानों के बीच जागरुकता के लिए काम करेंगी। उन्होंने कहा कि हमारे पास 16 हजार वैज्ञानिक हैं, जिनमें से चार-चार वैज्ञानिकों की टीमें बनाकर जमीनी स्तर पर जागरुकता का अभियान चलाया जाएगा। ये साल में दो बार निकलेंगी। रबी फसल के लिए अक्टूबर में अभियान चलेगा।
सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री राम नाथ ठाकुर भी शामिल हुए। राज्यों से आए मुख्य सचिवों, अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, कृषि आयुक्त, अन्य वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों ने भी शिरकत की।

