सीधी: सीधी जिले में सामने आए बड़े धान घोटाले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा द्वारा की जा रही है, लेकिन जांच प्रक्रिया आवश्यक दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण धीमी पड़ गई है। ईओडब्ल्यू को खरीदी केंद्रों से उठाई गई धान, जमा धान और मिलर्स से प्राप्त चावल में भारी अंतर का पता चला है। इस अंतर को स्पष्ट करने के लिए कांटा पर्ची, गाड़ी की बिल्टी और गाड़ी नंबर जैसे दस्तावेज अत्यंत आवश्यक हैं, लेकिन इन्हें जांच एजेंसी को उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, समिति सेवकों द्वारा ट्रांसपोर्टरों के माध्यम से धान बेची गई, और कई बार यह धान किसानों के खाते में दर्शाकर विक्रय की गई। ऐसे मामलों में ट्रांसपोर्टर, समिति सेवक और मिलर्स सभी आवश्यक कागजात देने से बच रहे हैं। यही कारण है कि मिलर, ट्रांसपोर्टर समिति कांटा पर्ची, गाड़ी की बिल्टी उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि नागरिक आपूर्ति विभाग के तत्कालीन प्रबंधक देवेन्द्र तिवारी द्वारा मिलर्स के फर्जीवाड़ा को रोंकने के लिए एक सर्कुलर जारी किया गया था।
उक्त सर्कुलर में कहा गया था कि मीटर रीडिंग जमा की जाए। उस दौरान भी कुछ मिलर्स द्वारा मीटर रीडिंग जमा नहीं की गई। धान घोटाले की आधी जांच मीटर रीडिंग से ही सामने आ सकती है। जानकारों का कहना है कि ईओडब्ल्यू द्वारा धान घोटाले की जो जांच सीधी जिले की शुरू की गई है उसकी जांच में गोदाम का भौतिक सत्यापन, ट्रांसपोर्टर द्वारा काटी गई विल्टी, टोल पर्ची, कांटा पर्ची, विभाग द्वारा धान उठाव एवं जमा के भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट, धान खरीदी के समय कितना चावल जमा हुआ और कितनी धान की उठाई हुई इस पर चावल की कांटा पर्ची, गाड़ी नंबर, टोल पर्ची का होना काफी आवश्यक है।
जांच के बाद दोषी पाए गए मिलर को धान न दिए जाने का आदेश है फिर भी अभी तक सीधी जिले के धान घोटाले की जांच ही दस्तावेजों के अभाव में पूरी नहीं हो पा रही है। हाल ही में स्टेट वेयर हाउस कार्पोरेशन के प्रबंधन के पत्र पर कलेक्टर द्वारा उपार्जन एवं मिलिंग की जांच के लिए टीम का गठन किया गया था। टीम का गठन होते ही मिलर और विभाग में हडक़ंप मच गया।
इनका कहना है
सीधी जिले में जांच के दौरान धान का जो अंतर पाया गया था उसकी जांच ईओडब्ल्यू द्वारा की जा रही है। ईओडब्ल्यू द्वारा जांच के लिए सभी आवश्यक कागजात संबंधितों से ले लिए जाएंंगे। अभी तक जो भी आवश्यक कागजात मिलर्स द्वारा जमा नहीं किए गए हैं उनको भी जमा करना पड़ेगा।
नागेन्द्र सिंह, जिला आपूर्ति अधिकारी सीधी
