
रीवा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रीवा में 96 करोड़ की लागत से बने अत्याधुनिक पाँच मंजिला जिला न्यायालय भवन का लोकार्पण किया। इस भवन में 40 कोर्ट रूम और 750 वकीलों के बैठने की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने इसे मध्यप्रदेश का सर्वश्रेष्ठ जिला न्यायालय भवन बताया और कहा कि इससे रीवा सहित पूरे प्रदेश को गर्व की अनुभूति हुई है। सीएम ने कहा रीवा में 1834 में तब के महाराजा ने दरबार से बाहर दो तरह के न्यायालयों की व्यवस्था की थी। उस समय आमजनता को न्याय सुलभ कराने का जो संकल्प लिया गया था उसे हम पूरा कर रहे हैं। हमारे देश में राजा हरिश्चन्द्र और महाराजा विक्रमादित्य जैसे प्रतापी और न्यायप्रिय राजाओं की परंपरा रही है। जिन्होंने सदैव जनहित और देशहित में निष्पक्ष होकर न्याय किया।लोकार्पण समारोह में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की उपस्थिति रही, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई। मुख्यमंत्री ने न्याय प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा लाए गए नए कानूनों की सराहना की और न्यायपालिका की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डाला।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों सूर्य कांत, जे.के. माहेश्वरी और सतीश चंद्र शर्मा ने भवन की आधुनिक सुविधाओं की प्रशंसा की और इसे आने वाले 50 वर्षों की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बताया। उन्होंने रीवा की न्यायिक परंपरा को गौरवशाली बताते हुए निष्पक्ष न्याय व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत ने बताया कि मध्यप्रदेश में प्रकरणों की संख्या अधिक है और 32 नए जजों की नियुक्ति जरूरी है। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा व विन्ध्य क्षेत्र के विकास कार्यों की जानकारी देते हुए भवन को गौरव का प्रतीक बताया। शुक्ल ने कहा कि रीवा ही नहीं पूरा विन्ध्य तेजी से विकास कर रहा है। यहाँ 40 मिलियन टन सीमेंट और 15 हजार मेगावाट बिजली के उत्पादन सहित अत्यधिक मात्रा में कोयले का भी उत्पादन होता है। विन्ध्य में रेलवे लाइन, फोरलेन सड़कों और एयरपोर्ट निर्माण के साथ हर क्षेत्र में विकास में तेजी आई है। समारोह में कई न्यायमूर्तिगण, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे। सभी ने इसे रीवा की न्यायिक परंपरा का नया अध्याय बताया।
