
ग्वालियर। बिठौली गांव में फॉरेस्ट के अधिकारीयों ने दल बल सहित पहुंचकर कसाराम बघेल की हरी भरी फसल पर जेसीबी चला कर उसे तहस-नहस कर दिया, इन खेतों में भिंडी ,प्याज खीरा आदि की फसल फल फूल रही थी।
मिली जानकारी के अनुसार, पिछले 35 सालों से कसाराम जिस जमीन पर खेती कर रहे हैं वह वन विभाग की जमीन है जिसके चलते आसाराम से यह जमीन मुक्त कराने के लिए वन विभाग द्वारा यह कार्रवाई की गई, वही कासाराम बघेल की माने तो सन 1986 में वन विभाग द्वारा ही उन्हें इस जमीन का पात्र बनाया गया और अब वन विभाग द्वारा ही हरी भरी फसल को तहस-नहस कर लाखों का का नुकसान किया गया। कसाराम के मुताबिक वन विभाग द्वारा उन्हें पूर्व में कोई सूचना पत्र तक नहीं दिया गया। उनकी फसल नष्ट कर दी गई। खेत पर बना मकान तोड़ दिया गया। यहां तक कि वन विभाग के अधिकारियों ने आस्था के केंद्र मंदिर तक को नहीं छोड़ा। मंदिर को भी तोडा। मंदिर की मूर्तियां भी वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा तोड़ी गई,
इस कार्रवाई के लिए भारी बल मोके पर पहुंचा था, कार्यवाही के दौरान किसान, किसान का पूरा परिवार रोता विलखता रहा, और रेंजर साहब अपनी धोस दिखाते रहे, मनमानी करते रहे, किसान की पत्नी गुहार लगाती रही साहब हमें दो दिन का समय दे दीजिए, फसल को यूं नष्ट न कीजिए पर रेंजर साहब को, वन विभाग के किसी भी अधिकारी को इस परिवार पर कोई रहम नहीं आया वन विभाग ने किसान के परिवार को इतनी मोहलत नहीं दी की किसान परिवार खीरे व भिंडी की फसल को तोड़ लेते जिसमें कुछ ही घंटे का समय लगता पर किसान परिवार को इतनी मोहलत नहीं दी गई,
