
ग्वालियर। 1 मई को भिंड में चाय पर चर्चा के नाम पर आयोजित कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों ने पत्रकारों के साथ मारपीट की। कार्यक्रम में एसआई गिरीश शर्मा और सत्यबीर सिंह ने संवाद की जगह गालियां दीं और कई पत्रकारों को लात-घूंसे मारे। पीड़ितों में अमरकांत सिंह, शशिकांत गोयल, प्रीतम सिंह समेत कई पत्रकार शामिल हैं। पत्रकारों की पिटाई मामले में पुलिस अधीक्षक पर गाज गिर सकती है।
घटना के बाद प्रदेशभर के पत्रकारों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यह केवल शारीरिक हमला नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा वार है। पत्रकारों ने आरोप लगाया कि सरकार और पुलिस प्रशासन पत्रकारों को डराने की कोशिश कर रहे हैं। पीड़ित पत्रकारों ने अपनी व्यथा सुनाई। पंकज भदौरिया ने मुख्यमंत्री, डीजीपी और अन्य जिम्मेदारों को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।अब तक न तो पुलिस अधीक्षक पर कोई कार्रवाई हुई है और न ही मारपीट करने वाले अधिकारियों को निलंबित किया गया है। पत्रकारों ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से मांग की है कि वे इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएं।
*गोविंद सिंह ने घटना की निष्पक्ष जाँच की मांग की*
पत्रकारों के साथ हुए व्यवहार पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह ने कड़ा ऐतराज जताया है उन्होंने इस घटना को लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर हमला बताया है, उन्होंने कहा पत्रकारों को चप्पलों से सिर्फ इसलिए पीटा गया क्योंकि उन्होंने पुलिस की अवैध वसूली और अन्य कृत्यों की ख़बरें दिखाई थी और चैनल पर चलाई, अब ये पत्रकार भिंड से जान बचाकर भाग चुके है, गोविंद सिंह ने सीएम डॉ मोहन यादव से इस घटना की निष्पक्ष जाँच की मांग की है
