मौर्य कालीन बौद्ध मठ पहुंच मार्ग से हटाओ अतिक्रमण

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने लम्हेटा घाट गोपालपुर के समीप मौर्यकालीन हजारों वर्ष प्राचीन बौद्ध मठ स्थित शासकीय जमीन पर कब्जा कर पहुंच मार्ग बंद किये जाने को चुनौती देने वाले मामले को गंभीरता से लिया। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत व जस्टिस विवेक जैन की युगल पीठ ने मामले की सुनवाई पश्चात् उक्त पहुंच मार्ग से तत्काल अतिक्रमण हटाने के अंतरिम आदेश दिये है। इसके साथ ही युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।

यह जनहित याचिका बौद्विस्ट सुसायटी ऑफ इंडिया के रीजनल हेड सुखलाल वर्मा व अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष दादा बैजनाथ कुशवाहा की ओर से संयुक्त रूप से दायर की गई है। जिनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, अधिवक्ता विनायक शाह शवांशु कोल, देवयानी चौधरी, संतोष आनंद ने पक्ष रखा। जिन्होंने बताया कि लम्हेटा घाट गोपालपुर के समीप मौर्य कालीन हजारो वर्ष प्राचीन वौद्ध मठ है, जिसे मुडिय़ा बौद्ध मठ के नाम से जाना जाता है। उक्त मठ से लगी 32 एकड़ शासकीय जमीन पर भूमाफियाओं द्वारा कब्जा करके आने जाने का रास्ता बंद कर दिया गया। जबकी बौद्ध मठ तक तत्कालीन कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने 27 जनवरी 2021 को मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड को पत्र लिखकर राशि स्वीकृति चाही थी। जिसके बाद मध्य प्रदेश शासन के पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय भोपाल द्वारा 15 जून 2012 को मुडिय़ा मठ बौद्ध स्तूप को एनसीएंट मॉन्यूमेंट्स एंड आर्कियोलॉजिकल साइट्स एंड रीमेंस एक्ट 1964 की धारा 3 की उप धारा-1 के तहत प्राचीन स्मारक राज्य संरक्षित स्मारक के रूप में घोषित करने की अधिसूचना जारी की गई। इतना ही नहीं 1 अप्रैल 2015 को पुरातत्व विभाग द्वारा मध्य प्रदेश शासन संस्कृति विभाग को पत्र लिखकर उक्त बौद्ध मठ को प्राचीन स्मारक के रूप में शामिल करने हेतु अंतिम अधिसूचना जारी करने का अनुरोध किया गया, लेकिन शासन स्तर पर उक्त प्राचीन कालीन बौद्ध मठ को संरक्षित करने हेतु कोई ध्यान नहीं दिया गया। जिसका नतीजा ये हुआ कि बौद्ध मठ से लगी 32 एकड़ जमीन पर कब्जा कर पहुंच मार्ग बंद कर दिया गया है। जिसकों लेकर आवेदकों की ओर से कई बार शासन-प्रशासन को पत्र भेजे गये, इतना ही नहीं धरना प्रदर्शन भी हुआ, लेकिन जवाबदारों ने कोई ध्यान नहीं दिया। मामले में मध्य प्रदेश शासन प्रमुख सचिव राजस्व विभाग वल्लभ भवन भोपाल, प्रमुख सचिव आर्कियोलॉजिकल गवर्नमेंट ऑफ़ मध्य प्रदेश, प्रमुख सचिव धार्मिक न्यास एवं धर्मस्य विभाग, सचिव टूरिज्म एंड कल्चर डिपार्टमेंट गवर्नमेंट ऑफ़ मध्य प्रदेश, कलेक्टर जबलपुर, एसडीओ रेवेन्यू जबलपुर, तहसीलदार जबलपुर, म्युनिसिपल ऑफिसर भेड़ाघाट जबलपुर व अनावेदक रीता सेंगर, गुंजन नंदा, सोनिया नारंग एवं आरडीएम केयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा मैनेजिंग डायरेक्टर अंगद दीप सिंह नारंग को पक्षकार बनाया गया है। मामले की सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने जबलपुर कलेक्टर को निर्देशित किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से उक्त प्राचीन बौद्ध मठ की देखरेख कर अतिक्रमण हटवाये।

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