मुंबई, 23 अप्रैल (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के चीन से होने वाले आयात पर शुल्क (टैरिफ) में कमी किये जाने के संकेत से व्यापार तनाव कम होने की उम्मीद से दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर के मजबूत होने से आज अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया 26 पैसे लुढ़ककर 85.45 रुपये प्रति डॉलर रह गया।
वहीं, इसके पिछले कारोबारी दिवस रुपया 85.19 रुपये प्रति डॉलर पर रहा था।
कारोबार की शुरुआत में रुपया नौ पैसे कमजोर होकर 85.28 रुपये प्रति डॉलर पर खुला और सत्र के दौरान आयातकों एवं बैंकरों की डॉलर लिवाली बढ़ने से 85.53 रुपये प्रति डॉलर के निचले स्तर तक लुढ़क गया। वहीं, बिकवाली होने से यह 85.26 रुपये प्रति डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। अंत में पिछले दिवस के 85.19 रुपये प्रति डॉलर की तुलना में 26 पैसे लुढ़ककर 85.45 रुपये प्रति डॉलर रह गया।
डीलरों के मुताबिक, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर रहा। रुपये पर यह दबाव मुख्य रूप से डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण देखा गया। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी ने भी रुपये की धारणा को कमजोर किया और किसी भी रिकवरी के प्रयास को सीमित कर दिया।
निकट भविष्य में रुपये की चाल अमेरिका के कुछ प्रमुख आर्थिक आंकड़ों जैसे विनिर्माण और सेवा पीएमआई तथा नए घरों की बिक्री पर निर्भर करेगी। ये आंकड़े डॉलर की दिशा तय कर सकते हैं, जिससे रुपया और अधिक अस्थिरता का सामना कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगले कुछ कारोबारी सत्रों में रुपया 84.75 रुपये प्रति डॉलर से 85.55 रुपये प्रति डाला के दायरे में रह सकता है जबकि डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल जैसी कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव प्रमुख भूमिका निभाएंगे।
