
रीवा। यूपी-एमपी सीमा को दर्शाने वाले मुनार को भी खनिज माफियाओं ने खोखला कर दिया है. हनुमना क्षेत्र में सक्रिय खनिज माफिया लगातार वन और राजस्व भूमि को खोखला करने में लगे हुए है.आगे चलकर दोनो राज्य की सीमा को लेकर विवाद बढ़ेगा. चिन्हित सीमा को खनिज माफिया खोखला कर चुके है.
उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे हनुमना की राजस्व और वन भूमि में कई वर्षो से अवैध उत्खनन हो रहा है. जानकार सूत्र बताते है कि हनुमना क्षेत्र उत्तर प्रदेश से लगा हुआ है और यहां एमपी-यूपी की सीमा को बताने वाले मुनार लगाये गये है. जिन्हे खनिज माफियाओं ने खुदाई के दौरान समाप्त कर दिया है. पहाड़ को खोखला करते हुए सीमा रेखा को समाप्त कर दिया गया है. जिससे अब पता ही नही चलता कि कहां किसकी सीमा है. राजस्व एवं वन विभाग एक दूसरे पर कार्यवाही करने का पलडा झाडते रहते है. खनिज विभाग कहता है कि जंगल विभाग कार्यवाही करे और जंगल विभाग खनिज विभाग की ओर इशारा कर देता है. जबकि हनुमना क्षेत्र में संयुक्त विभागीय कार्यवाही की आवश्यकता है. गौरतलब है कि हनुमना के अधिकांश क्षेत्र में एनजीटी द्वारा प्रतिबंध लगाया गया है।हनुमना तहसील के अन्तर्गत आने वाले लोढ़ी और हाटा एवं मझिगवां, घोरहा पहाड़ के आसपास से निकलने वाले पत्थर और पटिया उत्तर प्रदेश जाते है. कई बार अवैध खदान को लेकर पत्राचार भी किया गया लेकिन कोई कार्यवाही नही की गई. कहने के लिये तो टास्क फोर्स समिति बनी है लेकिन कभी भी संयुक्त कार्यवाही नही होती है. हनुमना के पूर्वी और पश्चिमी बिल्ली घाट में अवैध खदाने लगी है.इधर,
मऊगंज जिले में दर्जन भर से अधिक स्टोन क्रेशर संचालित हैं, जिनसे उठने वाली धूल से स्थानीय लोग परेशान है.स्टोन क्रेशर को लेकर हाल ही में स्थानीय विधायक प्रदीप पटेल ने जनता दरबार लगाकर शिकायत सुनी थी और मौके पर अधिकारियों को बुलाकर निराकरण के निर्देश दिये थे. वायु अधिनियम के तहत जो प्रावधान होने चाहिये वह स्टोन क्रेसर संचालको ने नही किया है.
