
रीवा। बूंद-बूंद पानी बचाने की मुहिम मे जनता अभी शामिल नही हो रही है.जिससे जल गंगा संवर्धन अभियान सरकारी कार्यक्रम तक सीमित रह गया है. जिले भर में जल संरक्षण का कार्य केवल फोटो खिचाने तक देखने को मिल रहा है.
नदी, तालाब और नहरो को साफ नही किया जा रहा है. जल संरक्षण एक तरह से कागज में चल रहा है. जब तक जनता इसमे जुडक़र अभियान को आगे नही बढ़ायेगी तब तक जल संरक्षण और जल गंगा संवर्धन अभियान के उद्देश्य की पूर्ति नही होगी. पानी बचाने की मुहिम हर साल चलती है जो केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित रह जाती है. एक दिन किसी नदी तालाब में खड़े होकर श्रमदान करने और फोटो खिचा लेने से जल संरक्षण नही हो जाता है. अभियान के नाम पर केवल फोटो खिचाने और खानापूर्ति का काम चल रहा है. प्रशासनिक दावा है कि बड़े पैमाने पर जल संरक्षण के कार्य किये जा रहे है. जिले भर में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है अभियान के तहत पानी की हर बूंद को सहेजने और धरती माँ के जल भण्डार को समृद्धि करने के लिए बड़े पैमाने पर जल संरक्षण के कार्य किये जा रहे हैं. अमृत सरोबर और खेत तालाबों के निर्माण के साथ पुराने तालाबों और स्टाप डैंप की साफ सफाई और सुधार का कार्य किया जा रहा है. कुंएं और नलकूपों में रिचार्ज पिट बनाये जा रहे हैं पर मैदानी हकीकत कुछ और ही है. जनता को जागरूक करने के लिये भी काम चल रहा है जिसमें जन अभियान परिषद और अन्य एनजीओ लगे हुए है. जल संरक्षण के लिये जिस तरह से काम हो रहा है उसकी हकीकत मैदान में जाने पर देखने को मिलेगी. पोस्टर बैनर पकड़ कर फोटो खिचला लेने तक ही जल संरक्षण का यह अभियान सीमित रह गया है. पूरी तरह से सरकारी कार्यक्रम बनकर यह अभियान रह गया है.
बिछिया-बीहर और तालाब गंदगी से पटे
जिले भर में तमाम शोर के साथ जल गंगा संवर्धन अभियान चल रहा है जो केवल खानापूर्ति तक ही है. रीवा और मऊगंज में अभियान के तहत काम हो रहे है. रीवा शहर से निकलने वाली बिछिया-बीहर नदी गन्दगी से पटी है. अगर सफाई करा दी जाय तो दोनो नदी को नया जीवन मिल सकता है. कई वर्षा से यहा नदी की सफाई होती है और कुछ दिन तक सफाई का काम चलता है. जैसे ही अभियान समाप्त हुआ सफाई भी बंद हो जाती है. दोनो नदी गन्दगी से पटी हुई है, यही हाल शहर के तालाबो का है. कई तालाबो का जीर्णोद्धार के साथ सौन्दर्यीकरण किया गया है लेकिन तालाब में गन्दगी बनी बनी हुई है इनको भी साफ कराने की जरूरत है.
