
इंदौर।सोशल मीडिया पर शेयर और क्रिप्टो में निवेश का लालच देकर लोगों से ठगी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर ठग नए-नए तरीके अपनाकर भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। सिर्फ इस वर्ष के पहले तीन महीनों में क्राइम ब्रांच को ऐसी 125 शिकायतें मिली हैं, जिनमें इंदौर के नागरिकों से लाखों रुपए की ठगी की गई है।
साइबर अपराधी पहले सोशल मीडिया पर दोस्ती करते हैं, फिर व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़कर लोगों को शेयर और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर मोटे मुनाफे का लालच देते हैं. शुरू में नकली लाभ दिखाकर लोगों का भरोसा जीतते हैं और जैसे ही निवेश की राशि ट्रांसफर होती है, वे सभी संपर्क तोड़ देते हैं. इन मामलों में महिलाएं, डॉक्टर, इंजीनियर, व्यापारी और रिटायर्ड अधिकारी तक शामिल हैं, जिन्हें लाखों की चपत लगाई गई है. ठगी की राशि एक लाख से लेकर दस लाख रुपए तक सामने आई है. पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि ठगों ने केवल तीन माह में इंदौर के 125 लोगों से करोड़ों रुपए हड़प लिए हैं. हालांकि राहत की बात यह है कि जिन लोगों ने समय रहते पुलिस से संपर्क किया, उनमें से कई मामलों में क्राइम ब्रांच ने ठगों के बैंक खाते ब्लॉक करवाकर राशि वापस दिलवाई है. इस वर्ष अब तक 2 करोड़ 23 लाख रुपए ठगी के शिकार लोगों को लौटाए जा चुके हैं, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 14 करोड़ रुपए तक पहुंचा था.
लगातार चल रही जागरूकता मुहिम
इंदौर पुलिस और साइबर क्राइम ब्रांच लगातार साइबर पाठशाला के ज़रिए जागरूकता अभियान चला रही है. आमजन से अपील की जा रही है कि किसी भी अनजान व्यक्ति या ग्रुप द्वारा निवेश का प्रस्ताव मिलने पर सतर्क रहें।
इनका कहना है
निवेश के नाम पर फंसाने वाली इस ठगी से बचाव का सबसे बेहतर उपाय है, सतर्कता और सजगता. सोशल मीडिया पर दिखने वाला मुनाफा असली नहीं होता, लेकिन नुकसान असली हो जाता है. इसलिए सतर्क रहे, सजग रहे और सुरक्षित रहिए।
एडीसीपी राजेश दंडोतिया
