जबलुपर: मप्र हाईकोर्ट ने असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा-2022 में आवेदक की उम्मीदवारी निरस्त किये जाने के मामले को गंभीरता से लिया। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत व जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने मामले में आवेदक को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए उसे 21 अप्रैल को होने वाले साक्षात्कार में शामिल किये जाने के निर्देश अनावेदकों को दिये।
इसके साथ ही युगलपीठ ने उक्त परिणाम को सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद निर्धारित की है।
यह मामला राजस्थान के बंसवारा निवासी उदित त्रिवेदी की ओर से दायर किया गया है। जिसमें कहा गया कि वे चार्टेड एकाउंटेंट है, जिसका उनके पास सर्टिफिकेट भी है। आवेदक का कहना है कि उन्होंने सहायक प्रोफेसर परीक्षा-2022 के लिये आवेदन किया था।
जिसकी परीक्षा भी उन्होंने उत्तीर्ण की, लेकिन चयन सूची में नाम आने के बाद भी उन्हें साक्षात्कार में शामिल नहीं किया जा रहा है, जिसका कारण बताया गया कि उक्त पद के लिये पीजी की डिग्री होना आवश्यक है। मामले में आवेदक की ओर से अधिवक्ता अंशुल तिवारी ने पक्ष रखा। जिन्होंने न्यायालय को बताया कि यूजीसी का सर्कुलर है कि सीए, सीएस व आईसीडब्ल्यूए को पीजी के समकक्ष माना जाये। आवेदक सीए है, जिस पर वह उक्त पद के लिये योग्य है।
