
नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (वार्ता) उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अगुवाई वाली तीन न्यायाधीशों की खंड पीठ ने बुधवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली 90 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, राजीव धवन, अभिषेक मनु सिंघवी और सी यू सिंह पेश हुए, जबकि केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पैरवी की।
याचिका में तर्क दिये गये हैं कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों का सरासर उल्लंघन करता है।
इसके खिलाफ दायर याचिकाकर्ताओं में अखिल भारतीय मजलिस-ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, तृणमूल कांग्रेस की लोक सभा सदस्य महुआ मोइत्रा, अभिनेता से नेता बने तमिलगा वेत्री कझगम के अध्यक्ष विजय और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी जैसे व्यक्ति और संगठन भी शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि यह कानून वक्फ संस्थानों की स्वायत्तता को गंभीर रूप से कमजोर करता है और इससे मुस्लिम बंदोबस्त पर सरकार का नियंत्रण बहुत बढ़ गया है।
गौरतलब है कि वक्फ (संशोधन) विधेयक को संसद के बजट सत्र में मैराथन चर्चाओं के बाद पारित किया गया। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक कानून बन गया।
