
अदालत ने दिया अहम फैसला
जबलपुर। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी रश्मि मंडलोई ठाकुर की अदालत ने अपने एक अहम आदेश में आदेश में स्पष्ट किया है कि छोटे-छोटे विवाद घरेलू हिंसा की श्रेणी में नहीं आते। चूंकि पत्नी के साथ घरेलू हिंसा प्रमाणित नहीं हुई, अत: वह घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम अंतर्गत अनुतोष पाने की अधिकारी भी नहीं है।
अनावेदक बिलासपुर निवासी नितिन वर्मा सहित अन्य की ओर से दलील दी गई कि नितिन का विवाह नमिता वर्मा के साथ हुआ था, जिन्होंने केस दायर किया है। उनकी ओर से घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम अंतर्गत अनुतोष दिलाए जाने की मांग की गई है। इस दंपति की एक संतान भी है। आवेदक ने पति के अलावा सास जेठ और जेठानी पर भी प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। हालांकि कथन से स्पष्ट हुआ है कि विवाद की वजह कोई बड़ी नहीं बल्कि छोटी-छोटी होती थीं। एक तथ्य यह भी है कि आवेदक अपनी ससुराल में अधिक समय नहीं रही। वह किसी न किसी बहाने मायके चली जाती थी। ऐसे में पति के अलावा अन्य सदस्यों पर आरोप अनुचित प्रतीत होता है। इसके पीछे छिपी दुर्भावना स्वमेव रेखांकित हो रही है। अदालत ने सभी तर्क सुनने के बाद घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम अंतर्गत अनुतोष दिए जाने की मांग महज आंशिक रूप से बच्चे के सिलसिले में स्वीकार की। पत्नी को राहत देने से मना कर दिया।
