HC का आदेश बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सीट छोड़ने वाले छात्र के सात दिन में दस्तावेज लौटाए

जबलपुर: मणिपुर दंगों में परिवार प्रभावित होने के कारण मजबूरन एमडी मेडिकल सीट छोडने पर भी ओरिजनल दस्तावेज वापस किये जाने के तीस लाख रुपये की मांग को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत तथा जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने मेडिकल छात्र को सात दिनों में पूर्व दस्तावेज लौटाने के आदेश जारी किये है। युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर में एमडी मेडिकल कोर्स के छात्र डॉ. थोंगम याइफाडा सिंह की तरफ से उक्त याचिका दायर की गयी थी। जिसमें कहा गया था कि वह साल 2021 में एमडी नीट परीक्षा में शामिल हुआ था। उसे ऑल इंडिया रैंकिंग के अनुसार साल 2022-23 में सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में सीट एलॉट हुई थी। याचिका में कहा गया था कि वह मूलतः इंफाल मणिपुर का निवासी है। मणिपुर हिंसा के कारण परिवार को छति पहुंची है और वह परिवार में एकमात्र पुरुष सदस्य बचा है। याचिका में कहा गया था कि एमडी कोर्स तीन साल का होता है और दो साल पूर्ण हो गये है। मजबूरन उसे कोर्स छोडना पड रहा है और ओरिजनल दस्तावेज वापस करने के लिए कॉलेज प्रबंधक तीस लाख रुपये मांग रहा है।

याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने युगलपीठ को बताया कि मेडिकल कमीशन ऑफ इंडिया के कहने पर राज्य सरकार ने साल 2025 से दाखिला लेने वाले छात्रों से सीट छोडने पर 30 लाख रुपये लेने का नियम समाप्त कर दिया गया। याचिकाकर्ता ओबीसी वर्ग से आता है और आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने कारण राशि जमा करने की स्थिति में नहीं है। परिवार में कोई पुरुष सदस्य नहीं होने के कारण उसे सीट छोडनी पड रही है। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किये।

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