ईकोनॉमिक कॉरिडोर में 40 बीघा जमीन और मिली

इंदौर: एमपीआईडीसी की बहुचर्चित इकोनॉमिक कॉरिडोर योजना में आज 40 बीघा जमीन और मिल गई है. इसको मिलाकर अभी तक 120 बीघा जमीन शासन को उक्त परियोजना के लिए मिल चुकी है. करीब 1300 हैक्टेयर से ज्यादा जमीन की जरूरत है. इकोनॉमिक कॉरिडोर की लागत 25 सौ करोड़ रुपए अनुमानित है.आज एमपीआईडीसी की बैठक में 50 से अधिक जमीन मालिकों ने हिस्सा लिया, जिसमें 40 बीघा जमीन के लिए सहमति प्राप्त हुई। इकोनॉमिक कॉरिडोर योजना में किसानों को एमपीआईडीसी विकसित प्लॉट का 60 प्रतिशत हिस्सा देगा.

आज एमपीआईडीसी के कार्यकारी डायरेक्टर राजेश राठौड़ ने बैठक में जमीन मालिकों को बताया कि परियोजना तय समय सीमा  3 साल में पूरी होगी. किसानों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. विकसित भूखंडों का उपयोग वे तुरंत सकेंगे. ध्यान रहे कि किसानों को पहले डर था कि जमीन चली जाएगी और बदले में जो मिलेगा, वो पर्याप्त नहीं होगा।  लेकिन अब स्थिति साफ हो गई है और शासन 60% विकसित प्लॉट मिलने की गारंटी दे रहा है ,तो हम इस परियोजना का हिस्सा बनने को तैयार हैं।
जहां जमीन वहीं मिलेंगे प्लॉट
पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर 19.6 किलोमीटर लंबी और 75 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण होगा. सड़क के दोनों ओर 300-300 मीटर के बफर जोन में विकसित की जाएगी. इसमें 17 गांवों- नैनोद, कोर्डियाबर्डी, रिजलाय, बिसनावदा, नावदापंथ, श्रीरामतलावली, सिन्दोड़ा, सिन्दोड़ी, शिवखेड़ा (रंगवासा), नरलाय, मोकलाय, डेहरी, सोनवाय, भैंसलाय, बागोदा, धन्नड़ और टिही की कुल 1331 हेक्टेयर जमीन शामिल है।परियोजना की अनुमानित लागत 2410 करोड़ रुपये है और इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है। किसानों के भूखंड फ्री होल्ड होंगे, यानि किसान इनका पूरा मालिकाना हक रख सकेंगे। ये भूखंड यथासंभव उसी गांव में आवंटित किए जाएंगे, जहां उनकी मूल जमीन स्थित है। भूखंडों का उपयोग आवास, व्यवसाय या बिक्री के लिए कर सकेंगे.
सहमति देने की प्रक्रिया
जमीन मालिक सहमति एमपीआईडीसी के कार्यालय में जमा कर सकते हैं. निर्धारित प्रारूप में दस्तावेज जमा कर पावती ले ले. इसके बाद एमपीआईडीसी और राजस्व विभाग की टीम जमीन का भौतिक निरीक्षण करेगी और निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर रजिस्ट्री एमपीआईडीसी के पक्ष में होगी. रजिस्ट्री से पहले किसानों को यह शपथ-पत्र देना होगा कि उनकी जमीन पर कोई विवाद या ऋण नहीं है

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