जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने नगर निगम जबलपुर की आयुक्त प्रीति यादव से पूछा है कि जिनको नियमित किया गया, उनकी योग्यता क्या है। इस संबंध में उनसे हलफनामा मांगा गया है। एकलपीठ ने मामले में कहा है कि उन्हें बताना होगा कि रोस्टर के किस बिंदु के विरुद्ध नियमितिकरण किया गया। मामले की अगली सुनवाई सात अप्रैल को होगी।
अवमानना याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी स्व. रामलाल कुशवाहा की पत्नी शांति कुशवाहा व दीनबंधु की ओर से दायर किया गया। जिसमें आरोप है कि नगर निगम जबलपुर में भर्राशाही चल रही है। आलम यह है कि पूर्व में याचिका पर राहतकारी आदेश पारित होने के बावजूद उसका पालन नहीं किया गया है। अपेक्षाकृत कनिष्ठों को नियमित कर दिया गया, याचिकाकर्ता इससे वंचित रखे गए। इस तरह वरिष्ठता प्रभावित हुई। मामले में कहा गया कि याचिकाकर्ता शांति कुशवाहा के पति रामलाल कुशवाहा का सेवा में रहते हुए 16 अक्टूबर, 2024 को निधन हो चुका है।
वे जीते जी नियमितिकरण का लाभ नहीं पा सके। जिसके बाद उनकी पत्नी न्याय की लड़ाई लड़ रहीं है। याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट के जीवनलाल बनाम प्रवीण कृष्ण न्याय दृष्टांत का हवाला दिया गया। जिसके अनुसार 2016 में गाइडलाइन दे दी गई थी कि यदि अपेक्षाकृत कनिष्ठ को नियमित कर दिया गया है, तो वरिष्ठ को भी करना होगा। मनमाने तर्क देकर उनका हक नहीं मारा जा सकता। इस मामले में नगर निगम आयुक्त ने पहले पढ़े-लिखे न होने यानि अनपढ़ होने की लचर दलील दी, इसके बाद आदेश के अनुपालन की दिशा में कुछ नहीं किया ।
