
रीवा।मऊगंज जिले के शाहपुर थाना अन्तर्गत गडऱा गांव फिर चर्चा में है।इस बार एक ही परिवार के तीन सदस्य पिता,पुत्र और बेटी फंदे पर लटके हैं। घर बंद था और उससे बदबू आ रही थी। पड़ोसियों की सूचना पर पुलिस ने जब दरवाजा खोला तो तीनों लटके मिले, एक हफ्ते पहले की घटना का अनुमान लगाया जा रहा है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर-एसपी मौके पर पहुंचे और फारेंसिक टीम ने जांच की. प्रथम दृष्टया आत्महत्या लग रही है और एक सप्ताह पूर्व के शव हो सकते है. शवो को पीएम के लिये अस्पताल भेजा गया. गांव में तनाव की स्थित को देखते हुए भारी पुलिसबल तैनात किया गया है.
उल्लेखनीय है कि गडऱा गांव में 15 मार्च को सनी दुबे नामक युवक की हत्या के बाद पहुंची पुलिस टीम पर आदिवासियो द्वारा हमला किया गया था. जिसमें एक एएसआई की मौत हो गई थी, जिसके बाद पुलिस ने 38 आरोपियो को गिरफ्तार करने के साथ सुरक्षा के दृष्टि से धारा 163 लगाई थी.
शुक्रवार की सुबह औसेरी साकेत के घर से आने पर पुलिस को सूचना दी गई. तत्काल कलेक्टर संजय जैन एवं एसपी दिलीप सोनी मौके पर पहुंचे और फारेंसिक टीम को जांच के लिये बुलाया गया. फांसी के फंदे पर औसेरी साकेत 55 वर्ष, 8 वर्षीय बेटा अमन साकेत एवं 11 वर्षीय पुत्री मीनाक्षी साकेत फंदे पर लटकी हुई थी। एफएसएल की टीम मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और घर से साक्ष्य जुटाए है. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौत कैसे हुई है.
पुलिस पर लगाया आरोप
इस मामले में परिजनो ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए है. मृतक के परिजनो का आरोप है कि हिंसक घटना के बाद सुरक्षा के लिये तैनात पुलिस लगातार परेशान कर रही थी और औसेरी साकेत के साथ मारपीट की गई थी. उसी दिन से उन्होने घर का दरवाजा नही खोला था. आक्रोशित परिजनो ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए जिम्मेदार ठहराया. मृतक के भतीजे और बहू ने आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने मार कर फंदे में लटका दिया है. पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिये. परिवार इस तरह आत्महत्या नही कर सकता. उधर ग्रामीणो का कहना है कि हिंसक घटना के बाद साकेत परिवार डऱा हुआ था. सुरक्षा को लेकर गांव में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई थी, जिससे लोग दहशत में थे.
शव लेकर जा रही एम्बुलेंस को रोका
पुलिस ने दरवाजा तोड़ कर तीनो शव को फंदे से उतार कर बाहर निकाला और जब एम्बुलेंस में लेकर पुलिस चलने लगी तो आक्रोशित परिजन एम्बुलेंस के आगे आ गए. महिलाओ ने एम्बुलेंस को आगे जाने से रोक दिया और विलाप करते हुए तत्काल कार्यवाही की मांग कर रहे थे. समझाइश के बाद महिलाएं पीछे हटी और जैसे ही एम्बुलेंस आगे बढ़ी तो पुन: रोक दिया. हालाकि बाद में पुलिस अधिकारियों की समझाइश और निष्पक्ष जांच के आश्वासन के बाद एम्बुलेंस को जाने दिया।
साकेत की पहली पत्नी की मौत हो गई थी जबकि दूसरी छोडक़र चली गई थी।
पहली पत्नी से चार बच्चे है जो बाहर रहते है. जबकि दूसरी पत्नी से दो बच्चे थे, पत्नी छोडक़र चली गई. सिलाई का काम करते वह परिवार का भरण पोषण करता था. पुलिस का प्रथम दृष्टया मानना है कि पारिवारिक कहल के चलते यह कदम उठाया गया है. लेकिन पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है.
इसी बीच
घटना की जानकारी मिलने पर भाजपा विधायक प्रदीप पटेल मौके पर पहुंचे और परिजनो को ढाढस बंधाते हुए निष्पक्ष जांच की बात कही और घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस एक-एक तथ्य के आधार पर जांच कर रही है जो तथ्य सामने आयेगे उसके आधार पर आगे की कार्यवाही होगी. तो वही पूर्व विधायक सुखेन्द्र सिंह बन्ना ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि यह सुनियोजित घटना हो सकती है, मुझे नही लगता कि आत्महत्या है. मऊगंज जिले के इतिहास में इतनी बड़ी दो घटनाएं घटी है, इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिये. उन्होने पुलिस की भूमिका पर भी संदेह जताते हुए सवाल उठाया.
इधर,
मऊगंज एसपी दिलीप सोनी ने बताया गडरा में साकेत समाज की बस्ती में घर से बदबू आने की सूचना मिली थी. पुलिस पहुंची तो घर अंदर से बंद था. आसपास के लोगों की मदद से पुलिस ने दरवाजा खोला गया तो अंदर तीन शव फांसी पर लटके हुए थे जिन्हे पीएम के लिये भेजा गया है. प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, पारिवारिक समस्या के कारण ऐसा कदम उठाया गया है. एफएसएल टीम ने मौके पर पहुंच कर जांच की है. पीएम रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि मौत का कारण क्या है, पुलिस एक-एक तथ्य पर जांच कर रही है. जो भी तथ्य सामने आयेगे उसके आधार पर कार्यवाही की जायेगी. एसपी ने कहा कि इस मामले में पुलिस कोई लेना देना नही है, जो आरोप परिजन लगा रहे है वह निराधार है.
