सिंगरौली :मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद जनसुनवाई में अधिकारियों की लेटलतीफी जारी है। समस्याओं का निस्तारण करना तो दूर अधिकारी-कर्मचारी समय से जनसुनवाई में ही नहीं पहुंच रहे हैं।मंगलवार को सुबह 10:30 से जनसुनवाई में दूर दराज गांव से आने वाले ग्रामीण अपने आवेदन लेकर भटकते रहे। लेकिन जिम्मेदार विभागों के अधिकारी नहीं पहुंचे। सभी विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों की कुर्सियां खाली नजर आई। हालांकि ज्वाइंट कलेक्टर संजीव पाण्डेय, डिप्टी कलेक्टर सौरभ मिश्रा, नंदकुमार तिवारी करीब पर जन सुनवाई शुरू की।
इस दौरान दूरदराज गांवों से आये ग्रामीणों से रमेश कोल तहसीलदार और प्रीति सिकरवार तहसीलदार आवेदन लेकर श्रम विभाग के जिम्मेदारों को आवाज देते रहे लेकिन अधिकारी नदारत रहे। बता दे की जनसुनवाई इस सोच के साथ शुरू की गई कि लोगों की समस्याएं यदि हल नहीं होती हैं तो वे इसमें जाएं और आला अधिकारियों तक अपनी बता पहुंचायें। लेकिन सिंगरौली में जनसुनवाई सिर्फ एक औपचारिकता मात्र रह गई है। इस मंगलवार को यहां जनता तो अपनी समस्या की सुनवाई के लिए पहुंच जाते हैं। लेकिन अफसर नदारद रहे हैं। जनसुनवाई में सभी विभागों के प्रमुखों को 10:30 बजे जनसुनवाई में पहुंचना होता है जहां मौजूद रहकर अधिकारियों को जनता की समस्याएं सुनते तथा उसका निस्तारण करने की जिम्मेदारी होती है।
चुनिंदा विभागों के अधिकारी ही मौजूद
मंगलवार को जनसुनवाई में चुनिंदा विभागों के अधिकारी ही मौजूद रहे। अधिकांश विभाग प्रमुखों के खुद जनता से उनकी समस्याएं जानने आने के बजाए अपने नुमाइंदों को यहां बैठाना उचित समझा। श्रम विभाग आरईएस, पीडब्ल्यूडी, पीएचई, नगर पालिका जैसे प्रमुख विभागों के मुखिया जनसुनवाई में नहीं पहुंचे। या यूं कहें कि अधिकांश विभागों के जिम्मेदार अधिकारी ही जनसुनवाई से गायब थे। ऐसे में यहां जनता की समस्याएं भी महज औपचारिकता भर रह गईं। लोग आते रहे, आवेदन देते रहे और अधिकारी वापस टीप लगाकर उन्हीं आवेदनों को उनकी पुरानी जगह पर भेजते रहे। खुद एडीएम प्रमोद सेन गुप्ता भी जनसुनवाई में 12 बजे के बाद ही पहुंचे।