जबलपुर: क्रिमिनल रिवीजन अपील की सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में एकलपीठ से कहा था कि इस कोर्ट में चार घंटो से तमाशा चल रहा है, मैं बैठे देख रहा हुॅ। जस्टिस अनुराधा शुक्ला की एकलपीठ ने अपीलकर्ता के बयान को न्यायालय के खिलाफ अपमानजनक और अवमाननापूर्ण टिप्पणी मानते हुए आदेश की प्रमाणित प्रति हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजने के आदेश जारी किये। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत तथा जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने संज्ञान आपराधिक अवमानना की सुनवाई की।
गौरतलब है कि छिंदवाड़ा निवासी राजहंस बगाडे तथा विजय की तरफ से क्रिमिनल रिवीजन अपील दायर की गयी थी। अपील की सुनवाई के दौरान विगत 22 मार्च को उनके अधिवक्ता पी सी पालीवाल ने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि इस कोर्ट में चार घंटो से तमाशा चल रहा है,मैं बैठे देख रहा हुॅ। हाईकोर्ट जज दूसरी जगह जाकर कहते है कि नये जज का अपॉइंटमेंट करों लेकिन जजेस का हाल तो देखो, दिल्ली में यह भी देखा जाये।
यहां पेडेंसी बढ रही है और हमें हैरेस किया जा किया जा रहा है। मैं आज शाम को जाकर मोहन यादव को बोलता हूॅ। यह केस 20 बार लग चुका है, बडी मुश्किल से आज नंबर आया। मैं अपने केस की बहस यहां नहीं करना चाहता, मेरे केस दूसरे बैंच में भेज दीजिए…अधिवक्ता की टिप्पणी को आदेश में लेते हुए एकलपीठ ने अधिवक्ता के बयान को न्यायालय के खिलाफ अपमानजनक और अवमाननापूर्ण टिप्पणी मानते हुए आदेश की प्रमाणित प्रति हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजने के आदेश जारी किये थे। एकलपीठ ने अपने आदेश में चीफ जस्टिस से आदेश का अवलोकन कर कार्यवाही का आग्रह किया था।
चीफ जस्टिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए अधिवक्ता के खिलाफ न्यायालय की आपराधिक अवमानना की सुनवाई के आदेश जारी किये थे। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत तथा जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने अपराधिक अवमानना की सुनवाई की गयी। इस दौरान अनावेदक अधिवक्ता ने उपस्थित होकर जिस न्यायालय में कथित अवमानना हुई उनके समक्ष बिना शर्त माफीनामा पेश करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद दो सप्ताह का समय प्रदान किया है।
