नयी दिल्ली 02 अप्रैल (वार्ता) केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मसौदा नियम सार्वजनिक कर दिया गया है और राज्य अपने सुझाव दे सकते हैं।
श्री प्रधान ने सदन में प्रश्नकाल के दौरान द्रविड मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के सदस्य तिरुची शिवा द्वारा पूछे गये सवाल के उत्तर में यह बात कही।
श्री शिवा ने पूछा था कि क्या यूजीसी के मसौदा दिशा-निर्देशों के संबंध में राज्यों के साथ कोई परामर्श किया गया है।
श्री प्रधान ने कहा कि यूजीसी के पास सुधारवादी नियम बनाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि मसौदा प्रस्ताव जनता के लिए उपलब्ध है और प्रत्येक राज्य के मुख्य सचिव और प्रधान सचिवों को इसकी जानकारी दे दी गई है। उन्होंने कहा कि दस से अधिक राज्यों ने अपने सुझाव दिए हैं, साथ ही राज्य, केंद्रीय, निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों सहित 52 विश्वविद्यालयों ने भी अपने सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने व्यापक रूप से परामर्शी दृष्टिकोण अपनाया है और सुधारित मसौदा सार्वजनिक डोमेन में डाल दिया गया है और कोई भी इसके लिए सुझाव दे सकता है।
श्री प्रधान ने कुलपति के चयन से संबंधित प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद से इस पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया है। हर बार जब राज्य न्यायालय गए हैं, तो उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि यूजीसी के सुझाव ही किसी भी मामले में मान्य होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र के बीच समन्वय है।
उन्होंने गैर-शैक्षणिक व्यक्ति को कुलपति नियुक्त किए जाने पर चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान परिवेश और प्रौद्योगिकी को देखते हुए, विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को शैक्षणिक संस्थानों का नेतृत्व करना चाहिए।
