ऊर्जा आपूर्ति और खपत दोनों में वृद्धि जारी

नयी दिल्ली 29 मार्च (वार्ता) भारत ने 2047 तक विकसित बनने के स्वप्न को साकार करने के लिए वैश्विक महामारी पर नियंत्रण पाकर वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान ऊर्जा आपूर्ति और खपत दोनों में स्थिर और स्वस्थ वृद्धि दर्ज किया है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने वार्षिक प्रकाशन ‘ऊर्जा सांख्यिकी भारत 2025’ शनिवार को जारी किया जिसके अनुसार भारत ने वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान ऊर्जा के मामले में स्वस्थ वृद्धि देखा है, जिसमें कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति (टीपीईएस) में पिछले वर्ष की तुलना में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 9,03,158 केटीओई (किलो टन तेल समतुल्य) पर पहुंच गई।
भारत में अक्षय ऊर्जा उत्पादन की अपार संभावना है जो 31 मार्च 2024 तक 21,09,655 मेगावाट है। पवन ऊर्जा से ऊर्जा उत्पादन की क्षमता में सबसे अधिक 11,63,856 मेगावाट (लगभग 55 प्रतिशत) की हिस्सेदारी है, इसके बाद सौर ऊर्जा (7,48,990 मेगावाट) और बड़ी पनबिजली (1,33,410) का स्थान आता है। अक्षय ऊर्जा उत्पादन की आधी से ज़्यादा क्षमता भारत के चार राज्यों में केंद्रित है जिनमें राजस्थान (20.3 प्रतिशत), महाराष्ट्र (11.8 प्रतिशत), गुजरात (10.5 प्रतिशत) और कर्नाटक (9.8 प्रतिशत) शामिल है।
नवीकरणीय संसाधनों से बिजली उत्पादन (उपयोगिता और गैर-उपयोगिता सहित) की स्थापित क्षमता में भी पिछले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 31 मार्च 2015 को 81,593 मेगावाट से बढ़कर 31 मार्च 2024 को 1,98,213 मेगावाट हो गई है, जो पिछले वर्षों में 10.36 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर है।
नवीकरणीय संसाधनों (उपयोगिता और गैर-उपयोगिता दोनों को मिलाकर) से बिजली का सकल उत्पादन भी पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ गया है। वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान उत्पादित 2,05,608 जीडब्ल्यूएच बिजली की मात्रा से, यह वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान बढ़कर 3,70,320 जीडब्ल्यूएच हो गई है, जो पिछले कुछ वर्षों में 6.76 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर है।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। यह वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान 14,682 मेगा जूल प्रति व्यक्ति से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान 18,410 मेगा जूल प्रति व्यक्ति हो गई है, जो पिछले कुछ वर्षों में 2.55 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि है।
पिछले कुछ वर्षों में ट्रांसमिशन और वितरण के कारण होने वाले नुकसान को कम करके बिजली के उपयोग में उल्लेखनीय सुधार किया गया है। ट्रांसमिशन और वितरण के कारण होने वाला नुकसान प्रतिशत जो वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान लगभग 23 प्रतिशत था, वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान घटकर लगभग 17 प्रतिशत रह गया है।
सभी प्रमुख ऊर्जा उपभोग क्षेत्रों में से, उद्योग क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान अधिकतम विस्तार देखा है। उद्योग क्षेत्र में खपत वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान 2,42,418 केटीओई से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान 3,11,822 केटीओई हो गई है। वाणिज्यिक और सार्वजनिक सेवा, आवासीय, कृषि और वानिकी जैसे अन्य सभी क्षेत्रों ने भी इस अवधि में लगातार वृद्धि दर्ज की है।

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