नयी दिल्ली 27 मार्च (वार्ता) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने एक जनवरी 2016 से पहले और उसके बाद के पेंशनभोगियों के बीच समानता ला दी है जो मौजूदा नियमों का सत्यापन है। इससे मौजूदा सिविल या रक्षा पेंशन में कोई बदलाव या परिवर्तन नहीं होता है।
श्रीमती सीतारमण ने सदन में विनियोग ( संख्याक 3) विधेयक 2025 और वित्त विधेयक 2025 पर हुई चर्चा का जबाव देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनवरी 2025 में केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन और लाभों को संशोधित करने के लिए 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की स्थापना को मंजूरी दी थी।
उन्होंने कहा कि एक जनवरी 2016 से पहले सेवानिवृत्त हुए सभी केंद्रीय सरकारी पेंशनभोगी एक जनवरी 2016 के बाद सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के बराबर पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। छठे वेतन आयोग द्वारा की गई सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए, पेंशनभोगियों के बीच अंतर अपरिहार्य है और इसे संशोधन के रूप में और सत्यापन के माध्यम से लाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सत्यापन नियम किसी भी तरह से मौजूदा सिविल पेंशनभोगियों के लिए वर्तमान चरण से निर्धारित मौजूदा पेंशन को नहीं बदलते या संशोधित नहीं करते हैं। सत्यापन नियम किसी भी तरह से रक्षा पेंशनभोगियों को प्रभावित नहीं करते हैं क्योंकि वे अलग नियमों द्वारा कवर किए गए हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह किसी भी पेंशन नियम या निर्देश में संशोधन नहीं है, बल्कि केवल उसी की पुष्टि है। 1 जून, 1972, यानी वह तारीख जब सीसीएस (पेंशन) नियम लागू किए गए थे।
उन्होंने कहा कि छठे वेतन आयोग ने एक जनवरी 2006 से पहले के सेवानिवृत्त और एक जनवरी 2006 के बाद के सेवानिवृत्त लोगों के बीच अंतर किया। तत्कालीन सरकार (कांग्रेस नीत संप्रग) ने वेतन आयोग की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था और फैसला किया था कि एक जनवरी 2006 की कट-ऑफ तिथि के संदर्भ में पेंशनभोगियों के बीच अंतर होगा।
