उज्जैन: अब उज्जैन में गौशाला की तर्ज पर कुत्ता शाला बनाने की तैयारी की गई है. जिसके लिए 50 लाख रुपए का बजट भी स्वीकृत हुआ है.नवभारत से चर्चा में उज्जैन नगर निगम के महापौर मुकेश टटवाल ने बताया कि 50 लाख रुपए का बजट मीटिंग में स्वीकृत कर दिया गया है. प्रस्ताव के तहत एमआईसी सदस्य रजत मेहता ने शहर में कुत्तों के काटने से जनहानि की बात कही थी, ऐसे में नए सिरे से प्रक्रिया अपनाई जाकर कुत्तों से निजात दिलाने के लिए मंथन किया जा रहा है.
पार्षद बोले कुत्ता शाला क्यों नहीं
बच्चे, बूढ़े और महिलाएं कुत्तों के काटने से लगातार उज्जैन शहर में अपनी जान गंवा रहे हैं. कुत्तों को पकड़ने के लिए जो अभियान चलाया जाता है वह नाकाफी है, ऐसे में पार्षद एमआईसी सदस्य रजत मेहता ने नगर निगम की बैठक में मांग रखी कि गौशाला की तर्ज पर कुत्ता शाला क्यों नहीं बनाई जा रही, इसी के बाद सर्वसम्मति से स्वीकृति दी गई.
10 लाख से बढ़कर बजट 50 लाख
धार्मिक नगरी होने के कारण देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंच रहे हैं. महाकाल मंदिर में भी कुत्तों का आतंक हो गया है. अन्य मंदिरों में भी श्रद्धालु कुत्तों के काटने से शिकार हो रहे हैं. शहर के 52 वार्ड में गली मोहल्लों में स्वच्छंद वितरण करने वाले कुत्तों की वजह से लोग भी हताहत हो रहे हैं. अब तक 10 लाख रुपए का बजट कुत्तों से निजात पाने के लिए था, जिसे आपत्ति के बाद अब सहमति से 50 लाख का बजट कर दिया है.
1 कुत्ते की नसबंदी में 1000
नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर संजेश गुप्ता ने बताया कि एक कुत्ते की नसबंदी करने में करीब 1 हजार रुपए खर्च करना पड़ता है. इसके लिए आवारा कुत्तों को पकड़कर सदावल डॉग हाउस में चार-पांच दिनों तक रखा जाता है. वहां उनकी नसबंदी से लेकर खान-पान और दवाइयों का पूरा इंतजाम होता है. टांके सूखने के बाद कुत्तों को उन्हीं स्थानों पर छोड़ा जाता है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। एक दिन में करीब 15 कुत्तों की नसबंदी की जाती है.
कमिश्नर बोले वही छोड़ते हैं जहां से पकड़ा
नगर निगम कमिश्नर आशीष पाठक ने बताया कि पीपुल्स फॉर एनिमल्स मेनका गांधी की संस्था से लेकर से लेकर अन्य तरह के दबाव प्रभाव कुत्तों के पकड़ने पर आ जाते हैं. आमतौर पर नसबंदी के बाद कुत्तों को उसी स्थान पर छोड़ना अनिवार्य है जहां से उन्हें पकड़ा गया हो. अब नए प्रस्ताव पर प्रक्रिया करेंगे.
