शेयर मार्केट में फर्जी मुनाफे का झांसा देकर ठगी करने वाली गैंग का भंडाफोड़

क्राईम ब्रांच ने किए सात आरोपी गिरफ्तार

इंदौर. शेयर बाजार में निवेश कर कई गुना मुनाफा कमाने का लालच देकर ठगी करने वाली गैंग के सात आरोपियों को क्राइम ब्रांच पुलिस ने गिरफ्तार किया है. इस गिरोह ने एक डॉक्टर से 3 करोड़ 8 लाख 36 हजार 293 रुपए की ठगी की थी.

गैंग फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों से संपर्क करती थी. फर्जी वेबसाइट का इस्तेमाल: पीड़ितों को वेबबुल नाम की वेबसाइट पर फर्जी शेयर मार्केट प्रॉफिट दिखाया जाता था. आरोपी बैंक खातों के जरिए पैसे ट्रांसफर करवाते थे और कमीशन कमाते थे. और इसी कमीशन की लालच में फंस गए थे. जब पीड़ित ने पैसे निकालने की कोशिश की, तो इनकम टैक्स, ग्रीन चैनल फीस, डिजिटल करेंसी सिक्योरिटी और इंश्योरेंस के नाम पर लाखों रुपए ऐंठे गए. इस मामले में क्राईम ब्रांच ने अब तक 112 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है. इंदौर के एक डॉक्टर को अज्ञात महिला ने व्हाट्सएप कॉल पर संपर्क कर वेबबुल प्लेटफॉर्म पर निवेश के लिए राजी किया. शुरुआती निवेश पर अच्छा मुनाफा दिखाया गया, जिससे डॉक्टर का विश्वास बढ़ गया. धीरे-धीरे उसने 1 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश कर दिया. जब डॉक्टर ने पैसा निकालने का प्रयास किया, तो अलग-अलग बहानों से उसे गुमराह किया गया, जैसे पहले 30 प्रतिशत इनकम टैक्स जमा करने को कहा, जिससे 55 लाख रुपए ठगे. फिर ग्रीन चैनल ओपनिंग के नाम पर 30 लाख रुपए ऐंठे. इसके बाद डिजिटल करेंसी सिक्योरिटी के लिए 17.81 लाख रुपए की मांग की. अंत में इंटरनेशनल ब्लॉकचेन सर्वर सिक्योरिटी इंश्योरेंस के नाम पर 25 लाख रुपए ठग लिए गए. इस तरह 64 ट्रांजेक्शन के जरिए डॉक्टर से 3.08 करोड़ रुपए की ठगी को अंजाम दिया गया था.

क्राईम ब्रांच एडीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि तकनीकी जांच और बैंक खातों के विश्लेषण के आधार पर क्राइम ब्रांच ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य रुप से आनंद पहाड़िया (27) – हवा बंगला, इंदौर, मोहित भावसार (28) – एरोड्रम, इंदौर, मोहम्मद रेहान (22) – उज्जैन, शाहरुख कुरैशी (27) – उज्जैन, एजाज खान (31) – उज्जैन, कुलदीप पगारे (25) – राजनगर, इंदौर, अमन नामदेव (25) – हाई लिंक सिटी, एरोड्रम, इंदौर हैं. पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे कमीशन के लालच में ठग गैंग से जुड़े थे. आनंद ने 50,000 रुपए के लालच में अपना बैंक खाता गैंग को दिया. मोहित ने अन्य खाताधारकों को गैंग से जोड़ा और कमीशन कमाया. अमन नामदेव बीई इंजीनियर बैंक अकाउंट्स को मैनेज करता था और साइबर तकनीकों की मदद से धोखाधड़ी को अंजाम देता था. क्राइम ब्रांच अभी अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है. पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही गिरोह के बाकी सदस्यों को भी गिरफ्तार किया जाएगा.

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