भाजपा पार्षदों के विरोध के बाद महापौर और सभापति की निधि नहीं बढ़ सकी
ग्वालियर :सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच हुये हंगामे और दो दिन चली बहस के बाद पार्षदों की मौलिक निधि बहुमत के आधार पर स्वीकृत हो गई जिसके बाद बैठक 25 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई।सोमवार को आयोजित निगम परिषद की बैठक में महापौर, सभापति और पार्षदों की मौलिक निधि व सुरक्षा अनुदान को बढ़ाये जाने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई।
बैठक में भाजपा पार्षद एकजुट दिखे और एक सुर से सुर मिलाकर मौलिक और स्वेच्छानुदान निधि बढ़ाने का जमकर विरोध किया जिसके बाद सभापति ने परिषद की बैठक मंगलवार तक के लिये स्थगित कर दी थी। जिसके बाद मंगलवार को परिषद की बैठक आयोजित की गई। मंगलवार को आयोजित बजट संशोधन बैठक में चार संशोधन प्रस्ताव पर चर्चा हुई।
जिसमें महापौर, अध्यक्ष एवं पार्षद की मौलिक निधि को लेकर चर्चा की गई तथा चर्चा उपरांत बहुमत के आधार पर सभापति मनोज सिंह तोमर ने प्रस्ताव को स्वीकृत किया। जिसमें महापौर एवं अध्यक्ष की निधि पूर्व के वर्षों की भांति यथावत रखने एवं पार्षद निधि 1 करोड 15 लाख रूपये करने तथा स्वेच्छानुदान निधि को समाप्त करने का निर्णय वोटिंग कराकर लिया गया। संशोधन प्रस्ताव के पक्ष में 38 वोट हाथ खडे करके डाले गए। चर्चा जारी रहते बैठक 25 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई।
