
कहा – डीजल बिलों का दावा कर याचिकाकर्ता ने किया सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को उजागर
जबलपुर। मुख्यमंत्री के सम्मान कार्यक्रम के लिए अधिग्रहित बसों में निगमायुक्त द्वारा डीजल भरवाने के संबंध में जबलपुर कलेक्टर द्वारा पेश किये गये हलफनामा पर हाईकोर्ट ने असंतुष्टि व्यक्त की है। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल ने अपने आदेश में कहा है कि कलेक्टर ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि प्रश्नगत कार्यक्रम नगर निगम का कैसे था। इसके अलावा नगर निगम को सार्वजनिक धन को विनियोजित करने और निजी वाहनों में डीजल भरने की आवश्यकता थी। एकलपीठ ने जिला कलेक्टर को बेहतर शपथ-पत्र दायर करने के लिए सात दिन का समय प्रदान करते हुए ऐसा नहीं करने पर व्यक्तिगत रूप से तलब करने की चेतावनी दी है।
याचिकाकर्ता सुगम चंद्र जैन की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि मुख्यमंत्री के सम्मान कार्यक्रम 3 जनवरी को जबलपुर में किया गया था। सम्मान समारोह के लिए अधिग्रहित बसों में आईएसबीटी बस स्टैण्ड के समीप स्थित पेट्रोल पंप से डीजर भरवाया गया था। अधिग्रहित बसों में डीजल भरने के लिए नगर निगमायुक्त ने खाद्य अधिकारी को व्यक्तिगत से भेजा था। अधिग्रहित बसों में लगभग 6 लाख रुपये का डीजल भरा गया था। निगमायुक्त के द्वारा बताया गया कि संयुक्त कलेक्टर तथा जिला आपूर्ति अधिकारी के कार्यालय की तरफ से बसों में डीजल भरवाने कहा गया था। अगस्त 2024 में बिल भुगतान के लिए संयुक्त कलेक्टर व जिला आपूर्ति अधिकारी व निगमायुक्त से संपर्क किया। जिसके बाद कलेक्टर कार्यालय से निगमायुक्त को राशि भुगतान करने के संबंध में लिखित निर्देश दिये गये थे।
एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से पूछा कि अधिग्रहित बस में डीजल भरने के लिए प्रशासन की तरफ से पीओएल जारी किया गया था। एकलपीठ ने इसे जनता के रूपये का दुरुपयोग मानते हुए जिला कलेक्टर हलफनामा में जवाब मांगा था। एकलपीठ ने कहा है कि कलेक्टर द्वारा सार्वजनिक वाहनों को अधिग्रहित करने के लिए जिन सार्वजनिक उद्देश्यों को रेखांकित किया जा सकता है, उनकी अधिसूचना अभिलेख पर लाई जाए। जिससे यह पता लगाया जा सके कि शपथ-पत्र के पैरा 8 में वर्णित उद्देश्य सार्वजनिक उद्देश्य की परिभाषा में आते हैं या नहीं।
इसके अलावा कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि प्रश्नगत कार्यक्रम नगर निगम का कैसे था, जिसके लिए नगर निगम को सार्वजनिक धन को विनियोजित करने और निजी वाहनों में डीजल भरने की आवश्यकता थी। निगम आयुक्त को सौंपे गए कार्यों में जनता के रूपये से डीजल व्यय का भुगतान करने जिम्मेदारी का कोई उल्लेख नहीं है। याचिकाकर्ता का भुगतान क्यों नहीं किया गया, इस संबंध में कोई उल्लेख नहीं किया गया है।
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता ने अपने डीजल बिलों का दावा करने के अलावा सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को उजागर किया है। जो प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने के लिए उपयुक्त मामला प्रतीत होता है। लेकिन ऐसा आदेश देने से पहले उचित स्पष्टीकरण होना आवश्यक है। याचिका पर अगली सुनवाई 18 मार्च को निर्धारित की गयी है।
