नयी दिल्ली 10 मार्च (वार्ता) राज्यसभा में सोमवार को सोशल मीडिया के दुरूपयोग पर गंभीर चिंता जताते हुए इस पर रोक के लिए सख्त कानून बनाये जाने की मांग की गयी।
भारतीय जनता पार्टी की कल्पना सैनी ने शून्यकाल के दौरान यह विषय उठाते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर लोगों को निशाना बनाकर उनके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल और गाली दी जाती है। उन्होंने कहा कि इससे पीड़ित व्यक्ति को काफी पीड़ा पहुंचती है और कई बार वह अवसाद का भी शिकार हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस दुरूपयोग को रोकने के लिए सख्त कानून बनाये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों को इस कंटेंट को हटाने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए और लोगों को भी जागरूक किये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतों से समाज में वैमनस्य और असुरक्षा का माहौल बन सकता है।
आम आदमी पार्टी के विक्रमजीत सिंह साहनी ने धर्म परिवर्तन के नाम पर लोगों को डराने और धमकाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ये लोग पैसे कमाने के लिए लोगों को डराते और धमकाते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए अंधविश्वास और काले जादू का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने इस पर रोक लगाने के लिए कानून बनाये जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियों को अपराध घोषित कर लोगों को शोषण से बचाया जाना चाहिए।
भाजपा की डाॅ. मेधा विश्राम कुलकर्णी ने पुणे को हाई स्पीड ट्रेन से जोड़ने की मांग की। उन्होंने कहा कि तेजस और राजधानी तथा अन्य तेज गति की ट्रेनें पुणे के लिए उपलब्ध नहीं है। अभी पुणे जाने वाली ट्रेन में 26 घंटे का समय लगता है।
इससे पहले सदन ने राज्यसभा के पूर्व सदस्य दिवंगत शमशेर सिंह मन्हास को श्रद्धांजलि अर्पित की। उप सभापति हरिवंश ने बताया कि श्री मन्हास ने सदन में जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने कहा कि श्री मन्हास के निधन से देश ने जम्मू-कश्मीर के विकास के प्रति समर्पित एक योग्य सांसद खो दिया है।
सदन ने भारतीय क्रिकेट टीम को आईसीसी चैम्पियंस ट्राफी जीतने पर मेजें थपथपा कर बधाई दी। उप सभापति ने कहा कि यह भारतीय क्रिकेट टीम की मेहनत और खिलाडियों के समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस जीत के लिए खिलाड़ी, कोच और सहायक स्टाफ बधाई के पात्र हैं।
इसके बाद सरकार ने सदन को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाये जाने की जानकारी दी। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मणिपुर में गत 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लगाये जाने से संबंधित दस्तावेजों की प्रति सदन में रखी।
