बेंगलुरु, (वार्ता) नैसेंट इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉइज सीनेट (एनआईटीईएस) ने कर्नाटक के श्रम विभाग पर सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनी इंफोसिस के मैसूरु परिसर में प्रशिक्षुओं की सामूहिक बर्खास्तगी की जांच में पक्षपात करने का आरोप लगाया है।
एनआईटीईएस ने अतिरिक्त श्रम आयुक्त (औद्योगिक संबंध) डॉ. जी. मंजूनाथ को पत्र लिखकर इस मामले में असंतोष जताया। संगठन का कहना है कि श्रम विभाग ने जांच के निष्कर्षों को चुनिंदा रूप से मीडिया को जारी किया लेकिन शिकायतकर्ताओं को कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी, जिससे पूरी जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
कर्मचारी संगठन ने आरोप लगाया कि श्रम विभाग का आचरण प्रशासनिक पक्षपात और बाहरी प्रभाव का संकेत देता है, जिससे जांच की निष्पक्षता संदेह के घेरे में आ जाती है। उसने कहा कि विभाग को कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए थी लेकिन इसके बजाय उसने इंफोसिस के हितों को प्राथमिकता दी।
पत्र में यह भी कहा गया, “यदि श्रम विभाग उत्पीड़ित कर्मचारियों के साथ खड़े होने के बजाय शक्तिशाली पक्ष का समर्थन करता है, तो वह अन्याय का भागीदार बन जाता है।” एनआईटीईएस ने श्रम विभाग से लिखित स्पष्टीकरण मांगा कि मीडिया को जानकारी देने से पहले शिकायतकर्ताओं को जांच निष्कर्ष क्यों नहीं बताए गए। इसके अलावा संगठन ने सहायक दस्तावेजों के साथ विस्तृत जांच रिपोर्ट, अंतिम निर्णय से पहले निष्कर्षों को चुनौती देने का अवसर, और भविष्य की कार्यवाही में अधिक पारदर्शिता की मांग की।
एनआईटीईएस ने चेतावनी दी कि यदि इन चिंताओं का तुरंत समाधान नहीं किया गया तो वह इस मामले को उच्च अधिकारियों तक ले जाएगा और कानूनी कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगा।
