नयी दिल्ली 25 फरवरी (वार्ता) दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने दिल्ली शराब नीति को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा है और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट से ‘आप-दा’ का भ्रष्टाचार लोगों को सामने आ गया है।
श्री सचदेवा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अब इस घोटाले के सूत्रधार श्री केजरीवाल, पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, राज्यसभा सांसद संजय सिंह को अब जवाब देना चाहिए।
शराब नीति को लेकर विधानसभा में पेश की गयी कैग की रिपोर्ट के मुद्दे पर श्री सचदेवा, पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद मनोज तिवारी और चांदनी चौक सीट से भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने पार्टी कार्यालय में संवाददाताओं को संबोधित किया। श्री सचदेवा ने कहा, “ आज दिल्ली विधानसभा में प्रस्तुत कैग रिपोर्ट से स्पष्ट है कि भ्रष्ट अरविंद केजरीवाल सरकार की शराब नीति के कारण 2,002.68 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। आप की नीतियों से राजस्व का भारी नुकसान हुआ। ”
उन्होंने बताया कि आप सरकार की शराब नीति के कारण शराब के लाइसेंस वापस किये जाने और शराब जोन की निविदा पुन: जारी करने के मामले में आबकारी विभाग की विफलता के कारण विभाग को 890.15 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 की पाबंदियों के नाम पर शराब की दुकान के लाइसेंस धारकों को दी गयी दी 144 करोड़ रुपये की छूट नियमानुसार नहीं थी। छूट के इस प्रस्ताव पर वित्त विभाग की आपत्तियों के बावजूद श्री सिसोदिया ने व्यक्तिगत रूप से इसकी मंजूरी दी थी। ”
उन्होंने कहा, “ कैग की रिपोर्ट से ‘आप-दा’ का भ्रष्टाचार सामने आ गया। शराब घोटाले से दिल्ली सरकार को हुआ 2002.68 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। ” उन्होंने श्री केजरीवाल पर तीखा प्रहार करते हुये उन्हें ‘शराब का दलाल करार’ दिया।
उन्होंने कहा, “ आज दिल्ली विधानसभा में प्रस्तुत कैग रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया है कि दिल्ली की आप-दा सरकार की ‘शराब नीति’श्री केजरीवाल और श्री सिसोदिया की महाभ्रष्ट जुगलबंदी का परिणाम थी। ”
उन्होंने कहा कि इन्होंने एकाधिकार को बढ़ावा दिया, कुछ ही कंपनियों को शराब आपूर्ति का पूरा नियंत्रण मिला। इसके बदले श्री केजरीवाल को धन प्राप्त हुआ।
श्री तिवारी ने कहा कि श्री केजरीवाल ने बदनीयती के कारण इतने वर्षों तक कैग की रिपोर्ट छुपा कर रखी थी। उन्होंने बताया कि शराब नीति में पहले सरकार का कमीशन ज्यादा और ठेकेदारों की हिस्सेदारी कम थी, लेकिन आप सरकार ने उसे बदल दिया और ठेकेदारों की हिस्सेदारी ज्यादा कर दी और श्री केजरीवाल ने परोक्ष रूप से कमीशन प्राप्त किये।

