ट्रंप की तुनक मिजाजी और बड़बोलापन

अमेरिका के राष्ट्रपति को दुनिया में अघोषित प्रथम नागरिक का दर्जा प्राप्त है, क्योंकि अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति है. अमेरिका केवल आर्थिक और सामरिक महाशक्ति नहीं है, बल्कि दुनिया का सबसे मजबूत और परिपक्व लोकतंत्र भी है. अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारी बहुमत से जीतकर आए हैं. जाहिर है दुनिया अमेरिका के राष्ट्रपति के फैसलों और बयानों को अत्यंत गंभीरता से लेती है, लेकिन प्रेसिडेंट ट्रंप जिस तरह से तुनक मिजाजी से काम कर रहे हैं वो अभूतपूर्व है. उनके अजीबोगरीब बयान और बड़बोलापन दुनिया में एक अलग तरह का तनाव उत्पन्न कर रहा है. कभी ट्रंप कनाडा को अपने देश (अमेरिका) में मिलने की धमकी देते हैं तो कभी कहते हैं कि अमेरिका गाजा पट्टी को खरीदेगा. डोनाल्ड ट्रंप का यह कहना भी बेतुका है यूक्रेन और रूस के युद्ध का कारण यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर ज़ेलेंस्की हैं. वो यूक्रेन के राष्ट्रपति को मसखरा, जोकर और तानाशाह कहते हैं. जेलेंस्की एक प्रभु सत्ता संपन्न देश के राष्ट्रपति हैं, ऐसे में अमेरिका जैसे स्वयंभू महान देश के राष्ट्रपति के मुंह से एक दूसरे राष्ट्रपति के लिए इस तरह की बातें करना मर्यादा के खिलाफ है. दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप कब, किसे, क्या बोल दें कहा नहीं जा सकता. एक मजबूत लोकतांत्रिक देश के राष्ट्रपति होने के बवजूद ट्रंप के बयान किसी सनकी तानाशाह की तरह नजर आते हैं. डोनाल्ड के बयानों को उनके पहले कार्यकाल में भी विश्वसनीय नहीं माना जाता था, लेकिन इस बार उनकी तुनक मिजाजी अलग लेवल पर नजर आ रही है. राष्ट्रपति ट्रंप ने पदभार संभालते ही एक के बाद एक 64 बड़े फैसले लेकर दुनिया में सनसनी फैला दी थी, लेकिन अब उनमें से कई फैसलों पर उन्होंने यू टर्न ले लिया है. जाहिर है डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. दरअसल,अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बाद जैसा प्रत्याशित था, वैसा ही हो रहा है.डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के साथ ही धड़ाधड़ वे फैसले लेने शुरू कर दिए, जिनका वह चुनाव प्रचार के दौरान उल्लेख किया करते थे. उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के अनेक फैसलों को पलटकर केवल यही नहीं रेखांकित किया कि उनके नेतृत्व में अब अमेरिका में हर स्तर पर व्यापक परिवर्तन होंगे, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि उनकी नीतियां अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी गहराई से प्रभावित करेंगी. इसकी पुष्टि इससे होती है कि उन्होंने पेरिस जलवायु समझौते से अलग होने के साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन से भी नाता तोडऩे का फैसला किया. आने वाले दिनों में व्यापार और कूटनीति से जुड़े उनके कुछ और फैसले विश्व पर असर डाल सकते हैं. समस्या केवल यह नहीं है कि इसके चलते कई देशों को अपनी प्राथमिकताएं बदलने के लिए बाध्य होना पड़ सकता है, बल्कि यह भी है कि विश्व समुदाय कई कठिनाइयों से भी घिर सकता है.उदाहरण स्वरूप अमेरिका के पेरिस जलवायु समझौते से बाहर होने से जलवायु परिवर्तन को रोकने के प्रयासों को गहरा धक्का लगेगा.यह ध्यान रहे कि विकसित देशों के रवैये के चलते पहले ही वैसे प्रयास नहीं हो पा रहे, जैसे आवश्यक हो चुके हैं.यह विचित्र है कि जब खुद अमेरिका जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों का सामना कर रहा है और कैलिफोर्निया के जंगलों में लगी आग इसका संकेत भी है, तब ट्रंप जलवायु परिवर्तन को कोई समस्या ही नहीं मान रहे हैं. यह सामने खड़े खतरे से मुंह मोडऩे के अलावा और कुछ नहीं है. ट्रंप के बयानों के कारण यूरोपीय यूनियन के सदस्य देशों में जबरदस्त नाराजगी है. अमेरिका का सबसे नजदीकी देश ब्रिटेन भी यूक्रेन के मामले में ट्रंप के बयानों को पसंद नहीं कर रहा है. कुल मिलाकर डोनाल्ड ट्रंप दुनिया में अनावश्यक तनाव पैदा कर रहे हैं. उन्हें इससे बचने की जरूरत है. जाहिर है डोनाल्ड ट्रंप की कार्य शैली से भारत को भी सतर्क रहना चाहिए.

 

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