दिल्ली की कमान सौंपने की कवायद शुरू 

मंत्रिमंडल में महिला, युवा,अनुभवी व पूर्वांचली को मिलेगा मौका

 

प्रवेश कुमार मिश्र

 

नई दिल्ली.

दिल्ली के नए मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला 19 फरवरी को होने वाले विधायक दल के बैठक में होना तय हुआ है. लेकिन 20 फरवरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ कौन लेगा , इस यक्ष प्रश्न का जवाब अभी सामने नहीं आया है इसलिए अटकलों का बाजार गर्म है.

 

 

दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में जो सवाल वाजिब उत्तर के लिए परेशान है उसके मुताबिक हर कोई एक दूसरे से पूछ रहा है कि क्या कोई चौंकाने वाले नाम सामने आने वाला है? क्या किसी पूर्वांचली विधायक को कमान सौंपकर बिहार को साधने का प्रयास किया जाएगा? क्या किसी महिला विधायक के हाथ दिल्ली की जिम्मेदारी देकर आधी आबादी को संतुष्ट करने का प्रयास किया जाएगा? क्या अपेक्षाकृत अनुभवी विधायक के सहारे विपक्षी घेराबंदी को ध्वस्त करने का प्रयास किया जाएगा? ऐसे तमाम सवालों को लेकर भाजपा के नवनिर्वाचित विधायक भी परेशान हैं. बताया जा रहा है कि पिछले आठ दिनों में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा व पार्टी रणनीतिकारों ने लगभग पंद्रह विधायकों के साथ अलग-अलग चर्चा कर पार्टी के संकल्प पत्र को कैसे अमलीजामा पहनाया जा सका है उसको लेकर उनकी रणनीति को समझने का प्रयास किया है.

 

 

सूत्रों की मानें तो दिल्ली में महिला मुख्यमंत्री देने को लेकर बहुस्तरीय विमर्श चल रहा है. क्योंकि मौजूदा समय में देश के विभिन्न प्रांतों में भाजपा की सरकार है लेकिन कहीं भी महिला मुख्यमंत्री नहीं हैं. ऐसे में रेखा गुप्ता, पुनम शर्मा, शिखा राय व नीलम पहलवान का नाम मुख्यमंत्री की रेस में चल रहा है. इसके अलावा पूर्वांचली वोटरों को साधने और बिहार की राजनीति को केन्द्र में रखकर सतीश उपाध्याय, अभय वर्मा, अनिल शर्मा , कपिल मिश्र और पवन शर्मा का नाम लिया जा रहा है. जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चुनावी शिकस्त देने वाले युवा विधायक प्रवेश वर्मा का नाम परिणाम आने के बाद से ही सबसे आगे चल रहा है. लेकिन अनुभवी विजेन्द्र गुप्ता व ओपी शर्मा के नाम पर जिस तरह से वरिष्ठ नेता एकजुट दिख रहे हैं उसके कारण यह कहना मुश्किल हो गया है कि अनुभवी, युवा, महिला या प्रवासी में से किसके हाथ दिल्ली का कमान सौंपा जाएगा.

 

सूत्रों की मानें तो दो उपमुख्यमंत्री भी बनाया जा सकते है. इसमें मोहन सिंह बिष्ट, आशीष सूद के अलावा सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा, तजिंदर सिंह मारवाह व अरविंद सिंह लवली जैसे पंजाबी नेता तथा राजकुमार चौहान जैसे दलित नेताओं में से किसी को मौका मिल सकता है. हालांकि इन सबके बीच यह भी कहा जा रहा है कि जिस तरह से मध्यप्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में मुख्यमंत्री के नाम का चयन कर भाजपा ने सबको चौंकाया था ठीक उसी प्रकार दिल्ली में भी हो सकता है.

 

बहरहाल, सबकी निगाहें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बैठक पर लगी है.

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