चंडीगढ़,15 फरवरी (वार्ता) नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वी.के. पॉल ने स्वास्थ्य सेवाओं के लिए वैश्विक मानकों को संतुष्ट करने वाले कौशल से सम्पन्न कार्यबल की आपूर्ति को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि भारत का स्वास्थ्य सेवा कार्यबल देश और विदेश, दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति है।
श्री पॉल ने कहा कि दुनिया में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित कार्यबल की मांग बढ रही है। वह राष्ट्रीय कौशल विकास निगम इंटरनेशनल (एनएसडीसी इंटरनेशनल) द्वारा स्वास्थ्य सेवा-सुश्रुषा क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन पर यहां आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।इस कार्यक्रम का विषय था- स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कुशल श्रमबल के भविष्य का कायाकल्प जिसमें 50 से अधिक विश्वविद्यालयों के कुलपति और10 से अधिक आयुर्विज्ञान संस्थानों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया।
एनएसडीसी इंटरनेशनल की शनिवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार श्री पॉल ने कहा, “भारत का स्वास्थ्य सेवा कार्यबल राष्ट्र और विश्व दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति है। कुशल पेशेवरों की बढ़ती वैश्विक मांग के साथ, संरचित कौशल पहल हमारे कार्यबल को अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए आवश्यक विशेषज्ञता से लैस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।”
श्री पॉल ने कौशल विकास के इस काम में एनएसडीसी इंटरनेशनल के उच्चकोटिक के प्रशिक्षित स्वास्थ्य सेवा प्रतिभाओं का बड़ा समूह विकसित करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे पेशेवरों को विविध स्वास्थ्य सेवा वातावरण में उत्कृष्टता प्राप्त करने में मदद मिली है।
उन्होंने कहा, “ कौशल विकास और प्लेसमेंट मार्गों को मजबूत करके, हम न केवल घरेलू स्तर पर कार्यबल की आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं, बल्कि दुनिया भर में कुशल देखभाल पेशेवरों के एक विश्वसनीय प्रदाता के रूप में भारत की स्थिति को भी बढ़ा रहे हैं।”
कार्यक्रम में इंटरनेशनल के सीईओ आलोक कुमार ने कहा, “2030 तक दुनिया भर में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में 1.5 करोड़ कुशल श्रमिकों की कमी रहने का अनुमान है। कुशल पेशेवरों की मांग इस समय अब तक के उच्चतम स्तर पर है। जर्मनी, जापान और कनाडा जैसे देशों ने पिछले दो वर्षों में ही अंतरराष्ट्रीय देखभाल करने वालों की संख्या में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की है।”
