इंदौर: केंद्रीय जेल में बुधवार को लघु उद्योग भारती संस्था द्वारा महिला बंदिनियों को प्राकृतिक होली के रंग बनाने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया. इस पहल का उद्देश्य न केवल बंदिनियों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रेरित करना भी है.केन्द्रीय जेल अधीक्षक श्रीमती अलका सोनकर ने बताया कि प्रशिक्षण सत्र के दौरान संस्था के विशेषज्ञों ने महिला बंदिनियों को फूलों, पत्तियों, हल्दी, चंदन और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों से होली के रंग बनाने की प्रक्रिया सिखाई.
बताया गया कि इन रंगों का उपयोग त्वचा के लिए सुरक्षित होता है और पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचाता. विशेषज्ञों ने समझाया कि कैसे बाजार में हर्बल रंगों की बढ़ती मांग के चलते यह एक अच्छा स्वरोजगार विकल्प बन सकता है. संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि प्राकृतिक रंग बनाने का यह कौशल बंदिनियों के लिए एक नया अवसर लेकर आएगा, जिससे वे अपने हुनर का इस्तेमाल कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं. यह पहल विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए लाभदायक होगी जो जेल से रिहा होने के बाद सम्मानजनक रोजगार पाना चाहती हैं.
दिखाई विशेष रुचि
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कई महिला बंदियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्राकृतिक रंग बनाने की विधि को ध्यानपूर्वक सीखा. उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान अपने अनुभव साझा किए और इस पहल को एक सकारात्मक बदलाव की ओर बढ़ने का अवसर बताया. एक बंदिनी ने कहा, हमें यह नहीं पता था कि फूलों और हल्दी से इतने खूबसूरत और सुरक्षित रंग बनाए जा सकते हैं. अब हमें एक नया कौशल सीखने को मिला है, जिससे हम भविष्य में कुछ अच्छा कर सकती हैं.
आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा
केंद्रीय जेल अधीक्षक ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि हम बंदिनियों के पुनर्वास के लिए इस तरह के प्रशिक्षण को हमेशा बढ़ावा देंगे. इससे उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने और आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा. संस्था लघु उद्योग भारती ने संकेत दिया कि वे भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम जारी रखेंगे और जेल में बने प्राकृतिक रंगों को बाजार तक पहुंचाने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा. इससे बंदिनियों को आर्थिक सहायता भी मिल सकेगी और वे अपने हुनर का सही उपयोग कर सकेंगी
