महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में नक्सलियों ने किया आत्म समर्पण के साथ ही बालाघाट में भी प्रयास जारी

नवभारत न्यूज बालाघाट

नक्सल एसपी श्री शुक्ला ने कहा नक्सल विकास में महत्वपूर्ण है मप्र की नक्सली आत्मसमर्पण पुनर्वास व राहत नीति

 

बालाघाट 11 फरवरी 25:-

 

विगत माह महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले में 11 इनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। नक्सल सेल के एएसपी श्री एके शुक्ला ने इस संबंध में बताया कि बालाघाट में भी नक्सली कार्यवाही लगातार जारी है। नक्सली कार्यवाही के साथ ही पुलिस द्वारा मप्र शासन द्वारा लागू की गई आत्म समर्पण नीति के तहत आत्म समर्पण कराने में तत्पर कार्य किये जा रहे है। अभी हाल ही में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में इनामी नक्सलियों द्वारा आत्म समर्पण किया गया था। ज्ञात हो कि गढ़चिरौली में 11 नक्सलियों में 6 महिला नक्सलियों द्वारा समर्पण किया गया था। इसी तरह बालाघाट पुलिस द्वारा भी मप्र नक्सली आत्मसमर्पण नीति 2023 के तहत आत्म समर्पण के तहत प्रयास लगातार जारी है। एएसपी श्री शुक्ला ने मप्र की नक्सली आत्म समर्पण नीति के विभिन्न पहलुओं के सम्बंध में बताया है।

 

हिंसा का रास्ता त्याग कर स्वेच्छा से आत्मसमर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवादियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए मप्र में नक्सलीआ आत्से मर्पण पूनर्वास सह राहत नीति 28 अगस्त 2023 से लागू है। इस नीति का उद्देश्य आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को लाभकारी रोजगार और उद्यमशीलता के अवसर प्रदान करना भी है। एएसपी श्री शुक्ला ने बताया कि यह नीति केवल उन नक्सलियों पर लागू होगी जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं या जो प्रतिबंधित संगठनों के महत्वपूर्ण पदाधिकारी/कैडर के सदस्य हैं और स्वेच्छा से आत्मसमर्पण करना चाहते हैं। राज्य स्तरीय जांच समिति की अनुशंसा है कि आत्मसमर्पण करने वाले को इस नीति के तहत लाभ तभी मिलेगा जब राज्य स्तरीय जांच समिति इसकी अनुशंसा करेगी। मापदंडों की पूर्ति के लिये आत्मसमर्पण करने वाले को विभिन्न शर्तें पुरी करनी होगी।

 

नक्सलियों के आत्मसमर्पण की प्रक्रिया

 

नक्सलियों के आत्मसमर्पण के लिए राज्य स्तरीय जांच समिति गठित की जाएगी, जिसमें एडीजी (गुप्तवार्ता), आईजी (नक्सल विरोधी अभियान), संबंधित जोन के आईजी और जिले के एसपी सदस्य होंगे। आत्मसमर्पणकर्ता किसी पुलिस अधिकारी, कार्यपालिक दंडाधिकारी, केंद्रीय सशस्त्र बल के सहायक सेनानी या राज्य सरकार द्वारा नामित अधिकारी के समक्ष आत्मसमर्पण कर सकता है। संबंधित अधिकारी इसे एस एंड आर अधिकारी और जिले के एसपी को सूचित करेंगे। राज्य स्तरीय समिति को 30 दिनों में प्रस्ताव स्वीकार/अस्वीकार करने का निर्णय लेना होगा। निर्णय तक आत्मसमर्पणकर्ता को सुरक्षित स्थान पर रखा जाएगा। यदि उस पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, तो न्यायिक कार्यवाही जारी रहेगी। आत्मसमर्पण स्वीकृत होने पर, जिले के एसपी द्वारा पुनर्वास प्रस्ताव जिला स्तरीय पुनर्वास एवं राहत समिति को भेजा जाएगा।

 

आत्मसमर्पित नक्सालियों के पुनर्वास के लिए आवश्यक बिंदु

 

आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्ति के पुनर्वास के दौरान निम्नलिखित कारकों को ध्यान में रखना आवश्यक होगा। जिसमें उसकी सामाजिक एवं आर्थिक पृष्ठभूमि, उसकी आयु, शैक्षणिक योग्यता, पुनर्वास योजना के तहत वह कौन सा व्यवसाय अपनाना चाहता है, उसकी पुनर्वास योजना का विस्तृत विवरण, नक्सल उन्मूलन अभियान में उसका सहयोग, पुनर्वास प्रक्रिया और निर्णय लेने की प्रणाली, नक्सलियों के पुनर्वास संबंधी सभी निर्णय जिला स्तरीय पुनर्वास एवं राहत समिति द्वारा लिए जाएंगे। गठित जाँच समिति द्वारा आत्मसमर्पण प्रस्ताव स्वीकृत किए जाने के 30 दिनों के भीतर जिला स्तरीय पुनर्वास एवं राहत समिति पुनर्वास प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति प्रदान करेगी।

 

नक्सलियों की पुनर्वास सुविधाएं

 

आत्मसमर्पणकर्ता ने यदि शस्त्रों (शस्त्र चालू हालत स्थिति में हों तो) के साथ समर्पण किया है तो ऐसी स्थिति में

एलएमजी, जीपीएमजी, आरपीजी, स्नाईपर रायफल, रॉकेल लाचर या इनके समान हथियार 4,50,000 रुपये प्रति हथियार के साथ ही.एके 47/56/74 रायफल, एसएलआर, कार्बाइन, 303 रायफल 3,50,000 रुपये प्रति हथियार रॉकेट, ग्रेनेड, हैड ग्रेनेड, स्टिक ग्रेनेड, आईईडी, इलेक्ट्रिक डेटोनेटर व अन्य डेटोनेटर 2,000 रुपये प्रति नग, रिमोट कट्रोल डिवाईस, वायलेस सेट, सैटेलाईट फोन, व्हीएचएफ, एचएफसेट 3,000 रुपये प्रति डिवाइस/सेट, पिस्टल व रिवाल्वर 20,000 प्रति हथियार, सभी प्रकार के एम्युनेशन एवं विस्फोटक पदार्थ 10,000 रुपये प्रति (एकमुश्त) सभी प्रकार के माइन्स 20,000 रुपये (एकमुश्त) और आत्मसमर्पणकर्ता को गृह निर्माण के लिए जिला स्तरीय पुनर्वास एवं राहत समिति की अनुशंसा पर रूपये 1,50,000/- का अनुदान दिया जाएगा। जीवित पति/पत्नी न होने की स्थिति में आत्मसमर्पणकर्ता यदि विवाह करने का इच्छुक है तो उसको रूपये 50,000/- की प्रोत्साहन राशि विवाह के समय दी जाएगी।

 

जिला स्तरीय राहत एवं पुनर्वास समिति द्वारा आत्मसमर्पणकर्ता को रूपये 5,00,000/- अथवा संबंधित संगठन में उसके द्वारा धारित पदनाम के आधार पर घोषित पुरस्कार की राशि (दोनों में से जो अधिक हो) प्रोत्साहन राशि के रूप में दी जाएगी। इस राशि में से रूपये 50,000/- संबंधित आत्मसमर्पणकर्ता को तात्कालिक आवश्यकतापूर्ति हेतु पुनर्वास प्रस्ताव स्वीकृ त होने के 07 दिवस के भीतर दी जाएगी। शेष राशि पुलिस अधीक्षक तथा आत्मसमर्पणकर्ता के संयुक्त सावधी जमा खाते में जमा की जाएगी। आत्मसमर्पणकर्ता के सतोषजनक आचरण को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के द्वारा संयुक्त सावधी जमा खाते में से अधिकतम रूपये 1,00,000/- प्रतिवर्ष की राशि आत्मसमर्पणकर्ता को दी जा सकेगी। उपरोक्त राशि को आत्मसमर्पणकर्ता द्वारा स्वरोजगार हेतु प्राप्त किये गये बैंक ऋण के विरुद्ध प्रतिभूति के रूप में भी उपयोग किया जा सकेगा।

 

आत्मसमर्पणकर्ता को अचल सम्पत्ति/जमीन क्रय करने हेतु रूपये 20,00,000/- अनुदान दिया जायेगा। आत्मसमर्पणकर्ता को उसकी रुचि के अनुसार व्यावसायिक प्रशिक्षण हेतु कुल रूपये 1,50,000/- का भुगतान किया जाएगा, जिसमें 50 प्रतिशत राशि आत्मसमर्पणकर्ता द्वारा शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश लेते समय तथा शेष 50 प्रतिशत राशि उसके द्वारा प्रशिक्षण उत्तीर्ण करने के पश्चात दी जाएगी। आत्मसमर्पणकर्ता को राज्य में प्रचलित “खाद्यान्न सहायता योजना के अतर्गत न्यूनतम दर पर निर्धारित खाद्यान्न प्राप्त करने की पात्रता होगी। आत्मसमर्पणकर्ता को पात्रतानुसार आयुष्मान भारत योजना का लाभ प्राप्त होगा

 

आत्मसमर्पित नक्सलियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण

 

आत्मसमर्पणकर्ता द्वारा किए गए जघन्य अपराधों की सुनवाई अदालतों में जारी रहेगी। आत्मसमर्पणकर्ता के पूर्ववृत्त और गुण-दोष के आलोक में लोकहित में मामला दर मामला आधार पर अभियोजन वापस लेने के संबंध में राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया जाएगा। आत्मसमर्पित नक्सलियों की नियुक्ति संबंधित पुलिस अधीक्षक आत्मसमर्पणकर्ता नक्सली की उपयोगिता का आंकलन करते हुये उसे गोपनीय सैनिक के पद पर नियुक्त कर सकेंगे। यदि आत्मसमर्पणकर्ता के सहयोग से नक्सल उन्मूलन ऑपरेशन में विशेष सफलता प्राप्त होती है तो ऐसी स्थिति में पुलिस अधीक्षक दवारा संबंधित जोन के पुलिस महानिरीक्षक की अनुशंसा एवं पुलिस महानिदेशक, मध्यप्रदेश के अनुमोदन से जिला पुलिस बल में आरक्षक के पद पर नियुक्त किया जा सकेगा। आरक्षक पद की नियुक्ति के लिए आवश्यक मापदण्डों में किसी भी प्रकार की छूट देने के लिए सबधित जोन के पुलिस महानिरीक्षक सक्षम होगे।

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