भीड़ के दबाव के साथ-साथ जबरदस्त जाम के चलते बढ़ रही हादसे की आशंका
सतना:प्रयागराज में महाकुंभ के आयोजन के दौरान सतना रेलवे स्टेशन पर संभावित भीड़ के मद्देनजर वरिष्ठ मंडलीय अधिकारियों द्वारा ताबड़तोड़ दौरा करते हुए मातहत अमले को क्राउड मैनेजमेंट को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के सख्त निर्देश दिए गए थे. लेकिन उक्त निर्देशों का रत्ती भर भी असर स्थानीय रेल प्रबंधन और आरपीएफ अमले पर होता नजर नहीं आ रहा है. नतीजतन स्टेशन परिसर में रेल यात्रियों की भारी भीड़ के साथ-साथ वाहनों की खचाखच ने एक ओर जहां लोगों को हलाकान कर रखा है. वहीं दूसरी ओर इस तरह की अनियंत्रित व्यवस्था किसी भी दिन हादसे का सबब बन सकती है.
प्रयागराज में 14 जनवरी से आरंभ हुए महाकुंभ का मौनी अमावस्या तक के स्नान तक सतना रेलवे स्टेशन पर विशेष दबाव देखने को नहीं मिल रहा था. लेकिन बसंत पंचमी के बाद से यहां का नजारा पूरी तरह से बदल चुका है. प्रयागराज जाने के साथ-साथ वहां से लौटने वाली ट्रेनों में जबरदस्त भीड़ उमड़ रही है. यह भीड़ केवल रेलवे प्लेटाफार्म अथवा फुट ओवर ब्रिज तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसका दायरा प्रतीक्षालय से लेकर सर्कुलेटिंग क्षेत्र तक फैला हुआ है. आलम यह है कि पिछले 4 दिनों से रेलवे स्टेशन परिसर में तकरीबन हर समय यात्रियों की आवाजाही बनी हुई है. वही किसी भी ट्रेन के प्लेटफार्म पर आते ही स्थिति बिगड़ती नजर आने लगती है. रेलवे प्लेटफार्म पर तो आरपीएफ और जीआरपी के जवान मुस्तैद रहते हुए किसी तरह स्थिति को संभालते नजर आते हैं. लेकिन प्लेटफार्म के बाहर से स्थानीय रेल प्रबंधन और आरपीएफ अमला दोनों नदारद रहते हैं.
नतीजतन सर्कुलेटिंग क्षेत्र में यात्रियों की भारी भीड़ के साथ-साथ वाहनों का दबाव अनियंत्रित होता नजर आने लगता है. आलम यह है कि किसी भी ट्रेन के प्लेटफार्म पर ठहरते ही लगभग आधे घंटे के लिए स्टेशन परिसर और सर्कुलेटिंग क्षेत्र पूरी तरह बाधित हो जाता है. एक ओर जहां भारी भीड़ स्टेशन से बाहर निकलने की जद्दोजहत में लगी रहती है. वहीं दूसरी ओर भीड़ का दूसरा हिस्सा जल्दी से जल्दी स्टेशन के अंदर पहुंचने की कोशिश करता है. इसी दौरान सैकड़ों चार पहिया वाहन, आटो और ई-रिक्शा रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग क्षेत्र को घेर लेते हैं. जिसके चलते सारी आवाजाही पूरी तरह ठप्प हो जाती है. इसी दौरान जल्दबाजी के चक्कर में निकलने वाले हुछ यात्री वाहनों की चपेट में आते-आते बचते हैं. वहीं कुछ लोग धक्कामुक्की का शिकार होकर गिरते नजर आते हैं. उस दौरान वहां की स्थितियां पूरी तरह से अनियंत्रित होती दिखाई देती हैं, जो कि किसी भी दिन हादसे का सबब बन सकती है. इन स्थितियों पर निगरानी करने अथवा उसे संभालने के लिए कोई भी जिम्मेदार दूर दूर तक नजर नहीं आता है.
नुमाईश के लिए बना टेंट
महाकुंभ शुरु होने से पहले मंडल रेल प्रबंधक, प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त आरपीएफ, वाणिज्य मंडल प्रबंधक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सतना रेलवे स्टेशन का दौरा करते हुए क्राउड मैनजमेंट सिस्टम पर विशेष फोकस किया गया था. यहां तक कि आरपीएफ पोस्ट के सामने आपात स्थिति से निबटने के लिए मॉक ड्रिल भी की गई थी. इसी कड़ी में प्रीमियम पार्किंग परिसर में टेंट भी लगाया गया था. लेकिन स्थानीय अमले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तंबू तनने से लेकर अब तक वह केवल नुमाईश के लिए ही बना नजर आ रहा है. महाकुंभ को लेकर पिछले कुछ दिनों से जिस तरह यात्रियों का दबाव रेलवे स्टेशन पर बढ़ता जा रहा है. लेकिन इसके बावजूद भी स्थानीय रेल प्रबंधन और आरपीएफ का बेपरवाह रवैया किसी भी दिन हादसे का सबब बन सकता है.
