
शिवपुरी में करैरा के एक खेत में गुरुवार शाम जहां एयरफोर्स का प्लेन गिरा था, वहां करीब 10 फीट चौड़ा और एक मीटर गहरा गड्ढा हो गया है। प्लेन से कूदे दोनों पायलट में से एक को स्थानीय ग्रामीण बल्ली परिहार ने सहारा दिया था। पायलट ने बल्ली के मोबाइल से ही अफसरों को दुर्घटना की जानकारी दी। पत्नी को फोन किया, फिर हादसे की तस्वीरें भेजीं।
हादसा ग्राम पंचायत भैंसा के सुनेरा गांव में हुआ, जिसकी आबादी एक हजार है। मिराज ने ग्वालियर से उड़ान भरी थी। एयरफोर्स ने हादसे की शुरुआती वजह सिस्टम में खराबी बताते हुए जांच के आदेश दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्लेन में हवा में ही आग लग गई थी। इसके बाद वह खेत में आ गिरा। मिराज के गिरते ही आसपास लोगों की भीड़ लग गई। पायलट ने ग्रामीण के मोबाइल से अधिकारियों को हादसे की जानकारी दी। ग्वालियर एयरबेस से स्पेशल हेलिकॉप्टर आया और दोनों पायलटों को अपने साथ ले गया। आज तड़के तक प्लेन की आग नहीं बुझी। मौके पर रोशनी के लिए ट्रैक्टर की मदद ली गई। लेकिन अब आग बुझा दी गई है। मौके पर रोशनी के लिए ट्रैक्टर की मदद ली गई। नरवर से लगभग 37 किलोमीटर दूर देरहटा सानी गांव के लोगों ने बताया कि यहां बस्ती के पहले एक खेत में आग जलती हुई दिखाई दे रही थी। यहां सुबह तक सेना के जवान मिराज को घेरे खड़े थे। जहां विमान गिरा, वहां से 30 फीट दूर से ही चारों तरफ बैरिकेडिंग की गई है। उसके अंदर किसी को भी जाने नहीं दिया जा रहा है। बैरिकेडिंग के बाहर ग्रामीण बैठे हुए हैं। इनमें से एक धर्मेंद्र बघेल ने कहा कि हमारा घर खेत से सटकर बना है। मैं अपनी छत पर खाना खा रहा था। तभी प्लेन दिखाई दिया। उसके पिछले हिस्से में आग लगी थी। उसने मेरे मकान के दो फेरे लगाए, फिर दोबारा ऊपर गया। इसके बाद खेत की तरफ जाकर क्रैश हो गया। मैं दौड़कर खेत पर पहुंचा। देखा तो वहां बड़ा गड्ढा हो चुका था। गेहूं की फसल भी जल गई थी। कुछ ही देर में लोग इकट्ठा हो गए। आधे घंटे में पुलिस और दूसरे अधिकारी पहुंच गए। घटना को याद करते हुए धर्मेंद्र की मां सरोज की आंखों में आंसू आ गए।
