बीएसएफ कॉलोनी में श्रीमद्भागवत कथा का दूसरा दिन
ग्वालियर: वेदव्यास ने ऋगवेद में से चार भाग कर चारों वेदों की रचना की। इसका सरलीकरण करने एक लाख श्लोक के महभारत की रचना की। उसके बाद 17 और पुराण लिखे, लेकिन फिर भी जब वे संतुष्ट नहीं हुए तो उन्होंने नारदजी से मार्गदर्शन लिया। नारदजी ने उन्हें समझाया कि आपने वेद-पुराणों में ज्ञान की चर्चा तो की, लेकिन भगवत नाम की महिमा एवं भक्ति का उल्लेख नहीं किया। नारदजी ने उन्हें चार श्लोक दिए, उन्ही चार श्लोकों से वेदव्यास ने 18 हजार श्लोकों की रचना की। पं संतोष काकोरिया ने बीएसएफ कॉलोनी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन यह विचार व्यक्त किए।
पं कांकोरिया ने कहा कि श्रीमद्भागवत को इसलिए सभी वेदपुराणों का सार कहा गया कि इसमें ज्ञान के साथ भक्ति और भगवत चरित्र की महिमा का बखान किया गया है। वही भागवत सुनने का अधिकारी है, जो ईष्या और द्वेष से खुद को मुक्त कर ले। उन्होंने यह भी गूढ़ रहस्य बताया कि जब भगवान धर्म की स्थापना करके चले जाते हैं तो मनुष्य सिर्फ भगवत नाम के आश्रय में रहता है। जीवन में यदि भगवत भक्ति आ जाए, तो इससे बड़ा सौभाग्य कोई नहीं है।
गायत्री मंत्र की महिमा का बखान करते हुए कहा कि गायत्री मंत्र इतना सशक्त है कि इसका वाचन करने से बड़े से बड़े पाप कट जाते हैं, इसलिए हमें गायत्री मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए। उन्होंने बताया कि वैसे तो भगवान के अवतार असंख्य हैं,लेकिन मुख्य रूप से 24 अवतारों का प्रमुख रूप से उल्लेख किया गया है। भगवान भक्तों पर कृपा करने एवं दुष्टों का संहार करने अवतार लेकर आते हैं। इस मौके पर कथा परीक्षत गुड्डीदेवी, पंडित रामकुमार करसोलिया महेश शर्मा राजकुमार त्रिपाठी विनोद मिश्रा ब्रजमोहन पचौरी आसाराम पचौरी आशीष पचौरी। मोनू पचौरी गिर्राज पचौरी, नीलेश पचौरी अजय शर्मा पंकज शर्मा केके शर्मा गिरजाशंकर पुरोहित रामकुमार कटारे, मुकेश शर्मा, रणवीर लोधी सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
