ग्वालियर मेला : आगाज हुआ नहीं, समापन की बेला आ गई

ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे
ग्वालियर मेला का उदघाटन हुआ नहीं और समापन समारोह की तैयारियां शुरू हो गईं। मेला सचिव की बातों से तो यही लगता है कि इस बार इस सवासौ साल की शानदार विरासत वाले ऐतिहासिक ग्वालियर मेला का उदघाटन नहीं होगा, यानि सीधे समापन समारोह ही आयोजित किया जाएगा। इसे मेला के लिए त्रासद स्थिति ही कहा जाएगा। दो महीने के इस मेला को शुरू हुए पेंतीस दिन से ज्यादा वक्त बीत चुका है। मेला पूरे परवान पर है लेकिन पिछले एक महीने से चल रही मेला के उदघाटन समारोह की तैयारी पूर्ण नहीं हो सकी। अब तो मेला अपने उत्तरार्ध काल में पहुंच चुका है, जैसा कि मेला सचिव फरमा रहे हैं, अब मेला का सीधे समापन समारोह ही होगा। यदि मेला अवधि बढ़ाई नहीं जाती है तो तयशुदा शिडयूल के हिसाब से 25 फरवरी को मेला का समापन कर दिया जाएगा।

हालांकि मेला व्यापारी संघ द्वारा दवाब बनाए जाने पर मेला की अवधि एक हफ्ते के लिए और बढ़ाई जा सकती है। ऐसा प्रतीत होता है कि सामाजिक लोकजीवन एवं व्यापार क्षेत्र के सभी पहलुओं को समाहित करने वाला यह मेला सिर्फ झूला सेक्टर और ऑटोमोबाइल सेक्टर तक ही सिमट कर रह गया है। गरीब और मध्यम वर्गीय लोग झूला और खानपान सेक्टर में खुशियां तलाश रहे हैं तो अमीर और आर्थिक रूप से ठीकठाक लोग सेल्स टैक्स छूट का लाभ उठाकर ऑटोमोबाइल सेक्टर में कारें खरीद कर अपनी ख्वाहिश पूरी कर रहे हैं। यह कहने में कोई गुरेज नहीं कि धूमधाम से अपना शताब्दी समारोह मना चुका यह मेला राजनीतिक गुटबाजी की भेंट चढ़ चुका है। पिछले छह साल से मेला प्राधिकरण में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पद पर नियुक्तियां नहीं हुई हैं।ग्वालियर मेला की शानदार विरासत को सहेजने व समृद्ध करने गंभीर प्रयासों की जरूरत है, वरना ग्वालियर की पहचान बन चुका यह आयोजन सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगा।

किरकिरी के बाद जेयू में कुलगुरु की रवानगी तय

जेयू में ऐसे त्रासद और शर्मनाक हालात कभी नहीं बने। ईओडब्ल्यू द्वारा एफआईआर दर्ज होने के बाद कुलगुरु बुरी तरह फंस गए हैं और उनका कुर्सी पर बने रहना मुश्किल है। झुंडपुरा कॉलेज के मामले की फाइल उच्च शिक्षा मंत्री के पास है और अब कुलगुरू कभी भी हटाए जा सकते हैं। हालांकि अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्होंने कुलगुरु सचिवालय में बैठना बंद कर दिया है। जाहिर है कि इस पूरे मामले में कुलगुरु और उनके सहयोगी प्रोफेसरों के साथ ही उच्च शिक्षा विभाग और सरकार की ऐसी किरकिरी हुई है, जिसकी नजीर सिर्फ इस यूनिवर्सिटी ही नहीं बल्कि सूबे की तालीमी तबारीख में पहले कभी नहीं मिलती।

माना जा रहा है कि उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार शीघ्र ही सीएम से कुलगुरु को बर्खास्त करने या धारा 52 लगाने की अनुशंसा राजभवन से कर सकते हैं। सीएम के विदेश प्रवास से लौटने का इंतजार किया जा रहा है। खबर तो यही है कि कुलगुरु प्रो. अविनाश तिवारी ने राजभवन से 31 जनवरी तक का समय मांगा है, क्योंकि वे इस रोज प्रोफेसर पद से रिटायर हो रहे हैं। उधर यूनिवर्सिटी के दोनों बड़े छात्र संगठनों एनएसयूआई और एबीवीपी ने कुलगुरु के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। कुलगुरु को हटाने के लिए एनएसयूआई हवन कर रही है तो एबीवीपी ने फर्जी कॉलेजों की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाने की मांग की है। कैंपस में बने इन असहज कर देने वाले हालात का असर छात्रों की पढ़ाई और अन्य अकादमिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। जाहिर है कि अगले एक दो रोज में फैसला लेना सरकार के लिए अपरिहार्य हो गया है।

चेंबर के शीर्ष पदों पर युवाओं की पहुंच अब होगी आसान

ग्वालियर चंबल अंचल के व्यापारियों व उद्योगपतियों की संस्था चेंबर ऑफ कॉमर्स अपने शीर्ष पदों के दरवाजे नौजवान टीम के लिए खोलने जा रही है। इसके लिए चेंबर के संविधान में संशोधन की तैयारी पूर्ण कर ली गई है। तैयार किए गए मसौदे के अनुसार कोषाध्यक्ष और संयुक्त सचिव के ओहदों पर अब 45 वर्ष तक की उम्र के व्यापारी ही चुनाव लड़ सकेंगे। लेकिन इसके उलट चेंबर अध्यक्ष और मानसेवी सचिव पद के लिए चुनाव और मुश्किल कर दिया गया है।

अभी तक दो बार के कार्यकारिणी सदस्य रहने पर ही चुनाव लडने की पात्रता हो जाती थी लेकिन अब संविधान संशोधन कर यह प्रावधान किया जा रहा है कि सिर्फ पूर्व पदाधिकारी ही अध्यक्ष और मानसेवी सचिव पद का चुनाव लड़ सकेंगे। संस्था की संविधान उपसमिति के सदस्य इन मसौदों पर आम सहमति बनाने में जुटे हैं लेकिन चेंबर के अनेक मेंबरान इन नई बंदिशों से इत्तेफाक नहीं रखते। उन्हें इन तब्दीलियों में कुछ चिन्हित लोगों को चेंबर चुनाव लड़ने से रोकने की साजिश नजर आ रही है। वैसे चेंबर की मौजूदा कार्यकारिणी को एक बरस पूरा हो चुका है। इस हिसाब से अगले बरस की शुरुआत में चुनाव कराए जा सकते हैं। चेंबर में कीपोस्ट पर नजरें गड़ाए बैठे व्यापारियों और उद्यमियों ने ताल ठोकना शुरू कर दिया है।

जो लोग कुंभ गए, उन परिवारों में चिंता

हर रोज कुंभ मेले में स्नान कर पुण्यार्जन करने के लिए ग्वालियर चंबल से हजारों लोग ट्रेन, बस और निजी साधनों से प्रयागराज कूच कर रहे थे लेकिन आज भोर की बेला में कुंभभूमि में हुई भगदड़ में डेढ़ दर्जन लोगों के मारे जाने और कईयों के घायल होने के बाद यह सिलसिला थम गया है। कई लोगों ने अपना प्रवास आगे के लिए टालते हुए अपने टिकट कैंसिल करा लिए हैं। इसके बावजूद श्रद्धा और आस्था में डूबा एक वर्ग ऐसा भी है जो ऐसी दुखद घटनाओं से अप्रभावित हुए बगैर कुंभ जाने पर अडिग है। जो लोग कुंभ गए हैं, आज की घटना के बाद उन परिवारों में चिंता है, उनका दिन अपनों की खैर खबर लेने में ही बीता।

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