सौरभ शर्मा चार फरवरी तक लोकायुक्त पुलिस की हिरासत में

भोपाल, (वार्ता) लोकायुक्त पुलिस छापों के बाद चर्चा में आए परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को आज लोकायुक्त पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद अदालत के आदेश पर चार फरवरी तक पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।

लोकायुक्त पुलिस सूत्रों के अनुसार इसके अलावा आज ही सौरभ शर्मा के सहयोगी चेतन गौर को भी अदालत के आदेश पर रिमांड (हिरासत) पर लिया गया है। सौरभ शर्मा और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर लोकायुक्त छापों की कार्रवाई के दौरान ही सुनसान स्थान पर जिस कार से 52 किलो सोना और लगभग दस करोड़ रुपए नगद आयकर विभाग को मिला था, वह कार चेतन गौर के नाम पर ही दर्ज होने की जानकारी सामने आयी थी।

लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ शर्मा को उस समय गिरफ्तार किया, जब वह अपने अधिवक्ता के साथ अदालत जा रहा था। बाद में उसे लोकायुक्त पुलिस ने अदालत में पेश किया और पुलिस के अनुरोध पर अदालत ने चार फरवरी तक लोकायुक्त हिरासत की स्वीकृति प्रदान की। इसी के साथ लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ के सहयोगी चेतन गौर को भी चार फरवरी तक रिमांड पर लिया है।

इसके पहले सोमवार को सौरभ शर्मा की ओर से यहां विशेष अदालत में समर्पण संबंधी आवेदन लगाया गया था। सौरभ के अधिवक्ता ने आज यहां मीडिया से कहा कि जब आज सौरभ को अदालत ले जाया जा रहा था, तभी उसे लोकायुक्त पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने इस कार्रवाई को अवैधानिक बताते हुए कहा कि इसे अदालत में चुनौती दी जाएगी।

पिछले माह उन्नीस और 20 दिसंबर को लोकायुक्त पुलिस ने परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर यहां छापे की कार्रवाई की थी। इस दौरान तीन करोड़ रुपए नगद, करोड़ों रुपयों के गहने और अचल संपत्ति संबंधी दस्तावेज मिले थे। इसी कार्रवाई के दौरान आयकर विभाग ने भोपाल के पास मेंडोरा के सुनसान स्थान से एक कार से दस करोड़ रुपए नगद और 50 किलोग्राम से अधिक सोना जप्त किया था। इस सोने की कीमत 30 करोड़ रुपयों से अधिक आकी गयी थी। यह कार सौरभ के सहयोगी चेतन गौर के नाम पर दर्ज थी। इसके बाद सौरभ और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय ने भी छापे की कार्रवाई की थी।

इन कार्रवाइयों के बाद से सौरभ शर्मा की विभिन्न जांच एजेंसियों को तलाश थी। आखिरकार लगभग 40 दिनों बाद सौरभ के अदालत पहुंचने की खबर आयी और अगले दिन मंगलवार को लोकायुक्त पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

सौरभ शर्मा मात्र छह सात साल ही परिवहन विभाग में आरक्षक के पद पर पदस्थ रहा। इसके बाद उसने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। उसके कथित रूप से प्रभावशाली लोगों से संपर्क हैं और इसी के चलते उसने अपने सरकारी चिकित्सक पिता के निधन के बाद परिवहन विभाग में अनुकंपा नियुक्ति हासिल की थी। उस पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप हैं।

 

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