डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा को तोड़े जाने के विरोध में कांग्रेस ने निकाला कैंडल मार्च

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (वार्ता) दिल्ली प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव के नेतृत्व में पंजाब के अमृतसर में संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा को तोड़े जाने की कोशिश की घटना की निंदा की है और इसे संविधान पर हमला करार दिया है।

इस घटना के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार को बादली विधानसभा क्षेत्र के सी.डी. ब्लॉक जहांगीरपुरी मुख्य मार्ग पर कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने आम आदमी पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ नारेबाजी की।

इस दौरान श्री यादव ने कहा कि गणतंत्र दिवस पर धर्म नगरी अमृतसर में डॉ. अम्बेडकर की मूर्ति के साथ ऐसी हरकत को पंजाब सरकार की नाक के नीचे सार्वजनिक रुप अंजाम दिया जा रहा था और पंजाब की सरकार पूरी तरह पंगु दिखाई पड़ी। उन्होंने कहा, “डॉ. अम्बेडकर की मूर्ति के साथ ऐसा दुर्व्यवहार और देश में बने ऐसे हालात चिंताजनक हैं। डॉ. अम्बेडकर की मूर्ति स्वर्ण मंदिर की ओर जाने वाली हेरिटेज स्ट्रीट पर टाउन हॉल में है।”

उन्होंने कहा कि डॉ. अम्बेडकर की प्रतिमा पर हमला, एक विचारधारा पर हमला है। पंजाब में आप की सरकार है, जहां पुलिस पूरी तरह से पहले से ही नकारा सिद्ध हुई है। उन्होंने कहा, “गणतंत्र दिवस के दिन हमने देखा कि कैसे एक व्यक्ति सीढ़ी लगाकर डॉ. अम्बेडकर की मूर्ति पर चढ़कर हथौड़े से तोड़ रहा है। संविधान लागू होने की 75वीं वर्षगांठ पर संविधान की कॉपी भी जलाई गई, जो सीधा संविधान पर भी हमला है।” उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थल पर इतनी बड़ी घटना पर प्रशासन, पुलिस आप नेताओं का रवैया नकारेपन को दर्शा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं हुआ, ऐसी घटनाओं के समय आप हमेशा नदारद नजर आती है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि पंजाब में डॉ. अम्बेडकर के खिलाफ खुलेआम ऐसी घटना होना साबित करता है कि राज्य में कानून- व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। इतनी बड़ी घटना पर आप सरकार पूरी तरह आंख बंद करके बैठी है। उन्होंने कहा कि यह घटना को दलितों के सम्मान को ठेस पहुंचाने के लिए साजिश के तहत अंजाम दिया गया है। उन्होंने कहा, “मैं केजरीवाल जी से पूछना चाहता हूं कि क्या पंजाब में भी पुलिस केन्द्र सरकार के आधीन है?”

श्री यादव ने कहा कि श्री केजरीवाल की दलित विरोधी सोच के कारण पंजाब और दिल्ली में दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और गरीबी रेखो से नीचे के लोग अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

 

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