ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे
कैलारस का शक्कर कारखाना बीते 13 साल से बंद था। सरकार अब इस कारखाने की भूमि की नीलामी कर रही है। कैलारस के तहसील कार्यालय में नीलामी प्रक्रिया चल रही है लेकिन बेरोजगारी झेल रहे यहां के नौजवान और किसान विरोध कर रहे हैं। विरोध भी इतना जबरदस्त है कि आंदोलन की अग्नि में चंबल अंचल का यह जिला सुलगने लगा है। इस ऐलान के बाद पुलिस – प्रशासन हर स्थिति से निबटने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने में जुट गया है। हालांकि कैलारस शुगर मिल का मुद्दा विगत कई चुनावों में विपक्ष की ओर से गर्माया जाता रहा है लेकिन बंद पड़े मिल की कीमती जमीन की नीलामी प्रक्रिया शुरू होने के बाद आंदोलन भड़क गया है और जौरा, सबलगढ़ व कैलारस के माहौल में गर्माहट है। हालात तब और बेकाबू होते दिखे जब मुरैना में किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता 800 ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर उग्र तेवरों के साथ सड़क पर उतर पड़े।
ये लोग शक्कर कारखाने की जमीन नीलामी का विरोध कर रहे थे। कांग्रेस ने जेल भरो आंदोलन भी चला रखा है। इस आंदोलन की कमान जौरा के विधायक पंकज उपाध्याय संभाले हैं। पुलिस ने उनके स्नेत समेत तमाम नेताओं को हिरासत में लिया है। विधानसभा के उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे भी अपनी टीम के साथ आंदोलन में शामिल हैं। आंदोलन कर रहे लोगों की मांग है कि शक्कर कारखाने को पुनः चलाया जाए, कर्मचारियों एवं किसानों का बकाया भुगतान किया जाए, कारखाने की संपति बेची नहीं जाए, कारखाने को चलाने के लिए सरकार सहायता करे। बीती रात ग्वालियर आए सीएम मोहन यादव ने भरोसा दिया है कि कैलारस शुगर मिल का मामला उनके संज्ञान में है और सभी शिकायतों का निवारण कर दिया जाएगा। सच्चाई यह है कि कैलारस शुगर मिल को फिर से चालू कराने के लिए कभी भी गंभीरता से प्रयास किए ही नहीं गए। न भाजपा ने और न ही छह साल पहले अल्पकाल के लिए सत्ता में आई कमलनाथ सरकार ने।
इधर 35 साल से बंद जेसी मिल के आठ हजार मजदूरों को बंधी उम्मीद
कैलारस शुगर मिल से ही कुछ मिलता जुलता मामला ग्वालियर में पिछले करीब तीन दशक से बंद पड़े ग्वालियर के जेसी मिल का है। मिल अचानक बंद होने से करीब आठ हजार मजदूर बेरोजगार हो गए थे और कभी दिन रात चमन बरसने वाले उपनगर ग्वालियर में बदहाली और मजदूर बस्तियों में कंगाली के हालात बन गए थे। मिल की अधिकांश जमीन भी बिक चुकी है लेकिन मिल मजदूर अपनी देनदारियों के भुगतान के लिए अभी भी मोहताज हैं। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने अपना पहला चुनाव मिल मुद्दे पर ही लड़ा और जीता था।
इसके बाद हर चुनाव में मिल मजदूरों के बकाया भुगतान को अपनी प्राथमिकता बताते रहे। इसे सरकार पर उनके द्वारा बनाए दवाब का ही नतीजा कहा जाएगा कि सीएम मोहन यादव ने ग्वालियर आकर जेसी मिल श्रमिकों की देनदारियों के भुगतान के प्रयासों को गति देने अहम बैठक ली। मुख्यमंत्री की मानें तो जेसी मिल के लगभग 8 हजार श्रमिकों की देनदारियों के भुगतान करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और प्रयास आखिरी दौर में पहुँच गए हैं। सीएम ने एक बार फिर से भरोसा दिया है कि इंदौर की हुकुमचंद मिल व उज्जैन की विनोद मिल की तर्ज पर जेसी मिल के लगभग 8 हजार श्रमिक बंधुओं की देनदारियों का भुगतान जल्द से जल्द होगा। देखना है कि जेसी मिल श्रमिकों को दिखाया गया यह सपना कब तक साकार होता है।
अध्यक्ष की चुनाव प्रक्रिया के बीच वीडी ने दिखाई ताकत
मंडल और जिला अध्यक्ष चुने जाने के बाद भाजपा में अब नया प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने की कवायद शुरू हो गई है, इसके लिए हरेक मंडल से प्रदेश प्रतिनिधि चुने जाएंगे। मौजूदा अध्यक्ष वीडी शर्मा का दोबारा अध्यक्ष चुने जाना मुश्किल है लेकिन उन्होंने ग्वालियर में अपने परिवार में आयोजित विवाह समारोह में भोपाल से लेकर दिल्ली तक के बड़े नेताओं की भीड़ जुटाकर अपनी राजनीतिक ताकत का इजहार जरूर करा दिया है।
महू की रैली कामयाब बनाने ग्वालियर को दी जिम्मेदारी
बाबा साहेब आंबेडकर की जन्मस्थली महू में 27 जनवरी को कांग्रेस बड़ा आंदोलन करने वाली है। इस दौरान कांग्रेस के लगभग सभी बड़े नेता महू में होंगे और यहीं से जय भीम, जय बापू, जय संविधान अभियान की शुरुआत करेंगे। इस आंदोलन में भीड़ जुटाने के लिए ग्वालियर कांग्रेस को भी बड़ी जिम्मेदारी मिली है। पूर्व विधायक प्रवीण पाठक कांग्रेस दफ्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर ग्वालियर में चल रही तैयारियों से वाकिफ करा चुके हैं। विधायक सतीश सिकरवार से लेकर दोनों सदर देवेंद्र शर्मा, पीडी जोहरे और प्रदेश महासचिव सुनील शर्मा भी तैयारियों में जुटे हैं। रैली में अब तक राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आने पर सहमति बन चुकी है।
