8 साल से रेलवे ओवर ब्रिज अधूरा, गुस्से में मुल्लापुरा और मोहनपुरा के रहवासी

30 करोड़ की लागत अब हो गई है 100 करोड़ रुपए
महाकुंभ भी माथे पर , नहीं बनी अदद एप्रोच रोड

उज्जैन: बडऩगर रोड पर मुल्लापुरा मोहनपुरा रेलवे ओवर ब्रिज का जो निर्माण कार्य 2019 में पूरा हो जाना चाहिए था। वह 2025 में भी अधूरा है। सिंहस्थ में साधु संतों से लेकर 70 गांव के लोगों के लिए यह ब्रिज बहुत उपयोगी साबित होने वाला बताया गया था। बावजूद इसके निर्माण कार्य अब तक अधर में है।महाकुंभ 2028 की तैयारी व निर्माण कार्यों से लेकर विकास कार्यों को कागजों पर तो खूब बताया जा रहा है। धरातल पर जो कार्य हो रहे हैं, उनमें लापरवाही बरते जाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। जो काम प्रारंभ हो गए हैं वह पूरे नहीं हो पा रहे हैं और जिनके दावे किए जा रहे हैं वह शुरू नहीं हो पा रहे हैं ।
मेहसाणा गुजरात की अजय प्रोटेक कम्पनी मोहनपुरा रेलवे और ब्रिज का काम कर रही थी। वर्ष 2017 में कंपनी को सेतु विकास निगम ने ठेका दिया था। काम पूरा नहीं हो पाया उसके पहले ही कंपनी ने जब लापरवाही बरती तो उसे ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया, ऐसे में कंपनी काम अधूरा छोडक़र भाग गई। मोहनपुरा मुल्लापुरा रेलवे ओवरब्रिज बडऩगर रोड पर निमार्णाधीन है। इस ब्रिज के बनने से सिंहस्थ 2028 के आयोजन में बहुत मदद मिलेगी। लाखों करोड़ों श्रद्धालुओं के साथ 70 गांव के किसानों के लिए यह ब्रिज मिल का पत्थर साबित होगा। बावजूद इसके इस महत्वपूर्ण ब्रिज का निर्माण पूरा नहीं हो पा रहा है।
बडऩगर मार्ग पर मोहनपुरा रेलवे और ब्रिज की बार-बार ड्राइंग डिजाइन बदली गई। जमीन अधिग्रहण विवाद हुआ। एक कंपनी काम छोडक़र भाग गई उसे ब्लैक लिस्टेड किया गया। 18 -19 -20 में कोरोना काल की वजह से भी काम बाधित हुआ। ऐसे में 30 करोड़ का ब्रिज 100 करोड़ से ज्यादा का हो गया है। पुल का निर्माण लगभग 70 प्रतिशत के लगभग हो चुका है। 30 प्रतिशत अधूरा है। वहीं पुल के सभी पिलर बनकर तैयार है। वहीं रेलवे क्रॉसिंग का हिस्सा भी बनकर तैयार हो गया है। पुल का कुछ हिस्सा ही बचा है। जिसका निर्माण कार्य किया जाना बाकी है। अभी निर्माण कार्य बंद पड़ा है। पुल बनाने के संसाधन वहीं पड़े हुए हैं।

बिलों का भुगतान नहीं होने पर रोका काम
मोहन पुरा पुल बनने से बडऩगर रोड के 70 गांव के लोगों को राहत मिलेगी, क्योंकि मोहनपुरा रेलवे क्रॉसिंग पर हमेशा वाहनों का लंबा जाम लगा रहता है। जब भी कोई ट्रेन निकलती है तो घंटों तक बडऩगर रोड का आवागमन रुक जाता है। रेलवे क्रॉसिंग के दोनों और वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। क्षेत्र के किसान खेत पर जाते हैं वहीं आसपास के लोगों को भी एक्सीडेंट का सदैव भय बना रहता है। इन सब से ब्रिज के बनने से निजात मिलेगी।

मुख्यमंत्री शिद्दत से जुटे, अफसर लापरवाह
मुख्यमंत्री डॉ. यादव जितनी शिद्दत से उज्जैन का विकास करने में जुटे हैं उतनी ही लेतलाली अफसरों द्वारा बरती जा रही है। मुख्यमंत्री ने उज्जैन का सिंहस्थ बेहतर तौर पर संपन्न करने का बीड़ा उठाया है। साथ ही शिप्रा के जल से ही स्नान करने से लेकर मूलभूत सुविधाएं साधु संतों के लिए जुटाने की बात कही है। बावजूद इसके सरकारी विभागों के बीच तालमेल का अभाव है।

2020 में होना था पूरा
नवभारत को मिली जानकारी के अनुसार उक्त रेलवे और ब्रिज का निर्माण जब 2017 में शुरू हुआ था। उसके पहले 2016 में ही कंपनी को ठेका दे दिया गया था। बीते सिंहस्थ के खत्म होते ही जिस प्रकार से यह काम शुरु हुआ था। ऐसे में यह बड़ी सौगात 2020 में मिल जाना चाहिए थी। वह अब तक अधूरी है, ऐसे में नई ठेका कंपनी पर भी अधिकारियों द्वारा संज्ञान नहीं लिया जा रहा।

इनका कहना है

जमीन और मुआवज का विवाद
बडऩगर रोड पर इस क्षेत्र में जहां मुल्लापुरा मोहनपुरा रेलवे ब्रिज बन रहा है यहां मेरी जमीन है। मेरी जमीन भी ले रहे हैं और उचित मुआवजा भी नहीं दे रहे हैं। शिकायत भी की है सुनवाई चल रही है। साथ ही ब्रिज का निर्माण कार्य अधूरा है कंपनी भाग गई है। कम्पनी का सामान उसका जहां तहां पड़ा हुआ है।
-महेश सिसौदिया, क्षेत्रीय किसान

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