गोयल की यूरोपीय संघ के व्यापार-आयुक्त के साथ वार्ता, मुक्त-व्यापार समझौते की बात आगे बढ़ेगी

नयी दिल्ली/ब्रुसेल्स, (वार्ता) यूरोपीय संघ (ईयू) के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत बातचीत के लिए यूरोप की यात्रा पर गए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री (सीआईएम) पीयूष गोयल ने ब्रुसेल्स में ईयू के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस शेफकोविच के साथ उच्चस्तरीय बैठक में प्रस्तावित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) सहित व्यापार और आर्थिक क्षेत्र में सहयोग के मुद्दों पर व्यापक चर्चा की है।

श्री गोयल ने भारत-ईयू व्यापारिक-आर्थिक सहयोग को बढ़ने के लिए छह व्यापक सिद्धांत रेखांकित किए जिसमें दोनों के संयुक्त रूप से विशाल बाजार की संभावनाओं के दोहन के लिए साझा मूल्यों पर आधारित भरोसेमंद भागीदारी, सार्थक एवं न्यायपूर्ण व्यापार एजेंडा, उच्च शुद्धता व स्वच्छता वाले उत्पादों के स्रोत के रूप में भारत के साथ सहयोग , प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण कच्चे माल के क्षेत्र में सहयोग तथा गैर-बाजारवादी देशों पर निर्भरता कम किए जाना,स्वच्छ विकास के लिए साझा परंतु विभेदात्मक दायित्व तथा भारत को युवा प्रतिभाओं के स्रोत के रूप में प्रोत्साहित करने के विषय में सहयोग एवं भागीदारी का सिद्धांत शामिल है।

श्री गोयल शनिवार से ब्रुसेल्स में हैं।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की रविवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार श्री गोयल ने श्री शेफकोविच से पिछले महीने परिचय के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बातचीत की थी। उसके बाद दोनोंं नेता पहली बार साथ बैठे हैं।

विज्ञप्ति के अनुसार श्री गोयल बातचीत में दोनों पक्षों के बीच आपसी सम्मान, एक-दूसरे की संवेदनशीलता के प्रति विचार-विमर्श तथा व्यापार एवं निवेश के क्षेत्र में भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक एजेंडे के लिए एक नया ढांचा स्थापित करने पर जोर दिया गया। बातचीत में श्री गोयल ने भारत को 1947 तक आर्थिक पैमानों पर एक विकसित देश बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया और ईयू के साथ लाभकारी साझेदारी बनाने के लिए छह व्यापक सिद्धांतों को रेखांकित किए।

विज्ञप्ति के अनुसार श्री गोयल ने श्री शेफकोविच के साथ प्रतिनिधितमंडल स्तर की वार्ता में सहयोग के छह सिद्धांतों को प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच लोकतंत्र, कानून के शासन और स्वतंत्र न्यायपालिका के साझा मूल्यों पर आधारित एक रिश्ता है। दोनों पक्ष एक भरोसेमंद भागीदार के रूप में, जो वर्तमान में अनुमानित 24 लाख करोड़ डॉलर से अधिक का बाजार प्रस्तुत करते हैं और यह भारत तथा यूरोपीय संघ की 2 की आबादीके लिए अभूतपूर्व अवसर प्रस्तुत करता है।

दूसरा उन्होंने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ के बीच व्यावसायिक रूप से एक सार्थक व्यापार एजेंडा बनाया जाए जो निष्पक्ष और न्यायसंगत हो। यह एजेंडा ऐसा होना चाहिए जो दोनों पक्षों के व्यवसायों, विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों, किसानों और मछुआरों के लाभ के लिए सरलीकरण और लागत प्रतिस्पर्धात्मकता के माध्यम से प्रशुल्कीय और गैर- प्रशुल्कीय बाधाओं का समाधान करता हो।

तीसरा, प्रधानमंत्री मोदी के त्रुटि-हीन और पारिस्थितिकी पर शून्य प्रभाव वाली उत्पादन क्षमता के स्पष्ट आह्वान के संदर्भ में भारत को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बाजार के रूप में बनाने के प्रयास में यूरोपीय संघ की श्रेष्ठ प्रथाओं को साझा किया जाए तथा गुणवत्ता आदि के मानकों में सामंजस्य स्थापित करने के लिए पारस्परिक प्रक्रियाओं का निर्माण किया जाए।

चौथा, भारत अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास, महत्वपूर्ण कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण करने के लिए दोनों पक्ष मिल कर काम करें – गैर-बाजारवादी अर्थव्यवस्थाओं पर निर्भरता कम की जाए।

पांचवां, विकास के संबंधित स्तर और सामान्य लेकिन विभेदित जिम्मेदारी के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष तरीके से व्यापार और सतत विकास के क्षेत्र में परस्पर सहयोग किया जाए।

छठा, बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने में अग्रणी और युवा, महत्वाकांक्षी और अत्यधिक प्रतिभाशाली लोगों के स्रोत के रूप में, पारस्परिक विकास और विकास में भागीदार होने के लिए यूरोपीय संघ के साथ एक जीवंत सेतु बने।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक सहयोग का एक नया एजेंडा बनाने के उद्देश्य से, दोनों नेताओं ने वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए व्यापार और निवेश के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी एजेंडा और एक मजबूत एफटीए विकसित करने के लिए दोनों टीमों के लिए राजनीतिक दिशा-निर्देशों को रेखांकित किया।

दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) के व्यापार और निवेश समूह में प्रगति की समीक्षा की, विरासत के मुद्दों को संबोधित करने पर सहमति व्यक्त की और दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्री स्तर के बीच निरंतर परामर्श के लिए एक रोडमैप तैयार किया।

बैठक में दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

 

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